दल-बदल पर हिमाचल में सख्ती: अयोग्य विधायकों की पेंशन बंद, विधानसभा में बिल पास

03 अप्रैल, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

Himachal Desk:  हिमाचल प्रदेश में दल-बदल की राजनीति पर रोक लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अगुआई में विधानसभा ने ‘हिमाचल प्रदेश विधानसभा सदस्यों के भत्ते और पेंशन संशोधन विधेयक, 2026’ को पारित कर दिया। विपक्ष के विरोध के बावजूद यह बिल बजट सत्र के अंतिम दिन मंजूर हुआ।

क्या है नए कानून में बदलाव?

नए प्रावधान के तहत अब कोई भी विधायक अगर दसवीं अनुसूची (दल-बदल कानून) के तहत अयोग्य घोषित होता है, तो उसे पेंशन सहित सरकारी लाभ नहीं मिलेगा। यह संशोधन 1971 के मूल कानून में बदलाव के रूप में लाया गया है।

किन विधायकों पर पड़ेगा असर?

इस फैसले के बाद कांग्रेस के पूर्व विधायक चैतन्य शर्मा और देवेंद्र कुमार भुट्टो को पेंशन से वंचित होना पड़ेगा। दोनों को 2024 के राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग और पार्टी व्हिप उल्लंघन के कारण अयोग्य घोषित किया गया था।

किन पर नहीं पड़ेगा प्रभाव?

  • निर्दलीय विधायक होशियार सिंह और केएल ठाकुर पर इस फैसले का असर नहीं होगा।
  • रवि ठाकुर और राजेंद्र राणा को पिछले कार्यकाल की पेंशन मिलती रहेगी।
  • सुधीर शर्मा, आशीष शर्मा और इंद्रदत्त लखनपाल दोबारा चुनाव जीतकर आए हैं, इसलिए उन पर भी इसका असर नहीं पड़ेगा।

क्यों अहम है यह फैसला?

यह कदम दल-बदल पर लगाम कसने और राजनीतिक अनुशासन बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब विधायकों को पार्टी लाइन से हटकर कदम उठाने से पहले पेंशन जैसे लाभ खोने का जोखिम उठाना होगा।

निष्कर्ष:
हिमाचल सरकार का यह फैसला राजनीतिक स्थिरता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे भविष्य में दल-बदल के मामलों में कमी आ सकती है।