27 अगस्त 2025 फैक्ट रिकॉर्डर
Himachal Desk: हिमाचल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में मानी पर्यावरणीय खामियां, छह माह में पेश करेगी ठोस रोडमैपनई
हिमाचल प्रदेश सरकार ने पर्यावरण संरक्षण की मौजूदा नीतियों और उपायों में गंभीर कमियों को स्वीकार करते हुए सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से एक व्यापक रोडमैप तैयार करने के लिए छह महीने का समय मांगा।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष दायर हलफनामे में राज्य ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और अनियंत्रित विकास के चलते हिमाचल प्रदेश अभूतपूर्व पारिस्थितिक असंतुलन का सामना कर रहा है। हाल के वर्षों में असामान्य बारिश, भूस्खलन, ढांचागत क्षति और मानव हताहतों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। बढ़ता तापमान, सिकुड़ते ग्लेशियर और बदले वर्षा पैटर्न भी बड़े खतरे के रूप में चिन्हित किए गए हैं।
सरकार ने बताया कि वह भूवैज्ञानिकों, जलविज्ञानियों, जलवायु विशेषज्ञों, अधिकारियों और सामुदायिक प्रतिनिधियों की एक उच्च स्तरीय समिति गठित करेगी, जो खामियों की पहचान कर ठोस व दीर्घकालिक रणनीति तैयार करेगी। महाधिवक्ता अनूप कुमार रतन और अतिरिक्त महाधिवक्ता वैभव श्रीवास्तव ने मौजूदा व्यवस्थाओं का ब्यौरा कोर्ट में प्रस्तुत करते हुए नई कार्ययोजना की आवश्यकता पर बल दिया।
न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ, जो पर्यावरण असंतुलन पर स्वतः संज्ञान से जुड़ी जनहित याचिका भी सुन रही है, ने मामले में सहायता के लिए एक न्यायमित्र नियुक्त किया है। अदालत ने सुनवाई की अगली तारीख चार सप्ताह बाद तय की।
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले राज्य और केंद्र सरकार को चेतावनी दी थी कि यदि अनियंत्रित निर्माण और विकास कार्यों पर अंकुश नहीं लगाया गया तो हिमाचल प्रदेश “देश के नक्शे से गायब” भी हो सकता है।