पेड़ों की कटाई पर हाईकोर्ट सख्त: बिना अनुमति रोक बरकरार, अदालत का सवाल—क्या आप नहीं चाहते आपके बच्चे जिंदा रहें?

24 जनवरी, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

Punjab Desk:  पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने बिना अदालत की अनुमति पेड़ों की कटाई पर लगी रोक हटाने से साफ इनकार कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सड़क दुर्घटनाएं गंभीर विषय हैं, लेकिन पर्यावरण का विनाश भी उतना ही बड़ा संकट है। सुनवाई के दौरान अदालत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा—क्या आप चाहते हैं कि आपके बच्चे और पोते-पोती जिंदा रहें या नहीं?

मोहाली में प्रस्तावित राउंडअबाउट (गोलचक्कर) परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई के मामले में हाईकोर्ट ने एक स्वतंत्र आयोग का गठन किया है। ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) ने पीआर-7 रोड पर ट्रैफिक जाम और सड़क दुर्घटनाओं का हवाला देते हुए 251 पेड़ काटने की अनुमति मांगी थी।

स्वतंत्र आयोग का गठन
अदालत ने वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए गठित आयोग में पंजाब के एडवोकेट जनरल, गमाडा, वन विभाग और याचिकाकर्ताओं के वकीलों को शामिल करने का आदेश दिया है। आयोग को चार दिन के भीतर स्थल निरीक्षण कर अगली सुनवाई से पहले विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी होगी।

हेरिटेज पेड़ों पर खास जोर
हाईकोर्ट ने आयोग को निर्देश दिया है कि काटे जाने वाले प्रत्येक पेड़ का सटीक स्थान दर्शाने वाला नक्शा और बर्ड्स-आई व्यू तैयार किया जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि प्रस्तावित पेड़ों में पीपल, बरगद और नीम जैसे हेरिटेज (दीर्घायु) वृक्ष कितने हैं और उनकी कटाई वास्तव में कितनी आवश्यक है। कोर्ट ने कहा कि केवल सरकारी मंजूरी पर्याप्त नहीं है, विशेषकर शहरी इलाकों में पुराने पेड़ों के नुकसान का स्वतंत्र और न्यायिक मूल्यांकन जरूरी है।

गमाडा की दलील पर कड़ा रुख
गमाडा ने दलील दी कि पंजाब ट्री प्रिजर्वेशन पॉलिसी, 2024 के तहत सभी वैधानिक मंजूरियां ली जा चुकी हैं और कटे पेड़ों के बदले पांच गुना पौधारोपण किया जाएगा। इस पर अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए पर्यावरणीय संतुलन पर सवाल खड़े किए।

किसानों को राहत
हाईकोर्ट ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए कहा कि यह रोक निजी भूमि पर की जा रही एग्रो-फॉरेस्ट्री पर लागू नहीं होगी। साथ ही यदि कोई पेड़ सड़ चुका हो या मानव जीवन के लिए तत्काल खतरा बन गया हो, तो सक्षम प्राधिकारी के प्रमाणन के बाद उसे हटाया जा सकता है।