05 अगस्त 2025 फैक्ट रिकॉर्डर
National Desk: शिबू सोरेन के निधन पर झारखंड शोक में डूबा, CM हेमंत सोरेन ने कहा- “मैं शून्य हो गया हूं” झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक शिबू सोरेन का सोमवार को निधन हो गया। 81 वर्षीय शिबू सोरेन लंबे समय से बीमार थे और दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की पुष्टि उनके बेटे और राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए लिखा, “आदरणीय दिशोम गुरुजी हम सभी को छोड़कर चले गए हैं। आज मैं शून्य हो गया हूं…”
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पिता को याद करते हुए लिखा कि वे न केवल उनके पिता थे, बल्कि उनके पथप्रदर्शक, विचारों की जड़ और उस जंगल जैसी छाया थे, जिसने हजारों-लाखों झारखंडवासियों को अन्याय की धूप से बचाया। उन्होंने लिखा, “मैं अपने जीवन के सबसे कठिन दिनों से गुजर रहा हूं। मेरे सिर से सिर्फ पिता का साया नहीं गया, झारखंड की आत्मा का स्तंभ चला गया है।”
उन्होंने अपने पिता की संघर्षभरी जीवन यात्रा को याद करते हुए बताया कि कैसे एक छोटे से गांव नेमरा में जन्मे शिबू सोरेन ने बचपन में ही अपने पिता को खो दिया था और जमींदारी के शोषण ने उन्हें जीवनभर के लिए संघर्षशील बना दिया। वे सिर्फ भाषण देने वाले नेता नहीं थे, बल्कि लोगों का दुःख महसूस करते थे और उनके बीच रहकर उनकी लड़ाई लड़ते थे। हेमंत ने बताया कि वे हल चलाते थे, खेतों में काम करते थे और जनता के साथ हर सुख-दुख में खड़े रहते थे।
हेमंत ने भावुक होते हुए यह भी लिखा कि उन्होंने जब बचपन में अपने पिता से पूछा कि लोग उन्हें ‘दिशोम गुरु’ क्यों कहते हैं, तो शिबू सोरेन ने मुस्कुराते हुए कहा था, “क्योंकि मैंने उनके दुःख को समझा और उनकी लड़ाई अपनी बना ली।” यह उपाधि न किसी किताब में लिखी गई थी, न संसद ने दी थी, बल्कि यह झारखंड के लोगों के दिल से निकली थी।
अपने पिता के राजनीतिक सिद्धांतों को याद करते हुए हेमंत सोरेन ने कहा कि शिबू सोरेन ने कभी सत्ता को उपलब्धि नहीं माना। उन्होंने कहा था कि यह राज्य उनके लिए कोई कुर्सी नहीं, बल्कि उनके लोगों की पहचान है। हेमंत ने लिखा, “अब जब वे हमारे बीच नहीं हैं, तो भी झारखंड की हर पगडंडी, हर मांदर की थाप, हर खेत की मिट्टी और हर गरीब की आंखों में वे झांकते हैं। उनका सपना अब मेरा वादा है। मैं झारखंड को झुकने नहीं दूंगा और उनके नाम को कभी मिटने नहीं दूंगा।”
अंत में, उन्होंने अपने पिता को श्रद्धांजलि देते हुए कहा, “बाबा, अब आप आराम कीजिए। आपने अपना धर्म निभा दिया। अब हमें आपके नक्शे-कदम पर चलना है। झारखंड आपका कर्जदार रहेगा। मैं, आपका बेटा, आपका वचन निभाऊंगा। वीर शिबू जिंदाबाद, दिशोम गुरु अमर रहें। जय झारखंड, जय जय झारखंड।”
शिबू सोरेन के निधन से झारखंड ने न सिर्फ एक जननायक को खोया, बल्कि एक विचारधारा, एक आंदोलन और एक जीवंत प्रतीक को भी अलविदा कह दिया।