नई दिल्ली | 26 दिसंबर 2025 Fact Recorder
हेल्थ डेस्क :राजधानी दिल्ली-एनसीआर इन दिनों गंभीर वायु प्रदूषण की चपेट में है। बीते करीब दो महीनों से एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) लगातार ‘खराब’ से ‘बेहद खराब’ श्रेणी में बना हुआ है। हवा में मौजूद जहरीले प्रदूषकों और गैसों की बढ़ती मात्रा लोगों की सेहत के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है।
इससे पहले रिपोर्ट में दिल्ली की हवा में ओजोन गैस के बढ़ते स्तर को लेकर चेतावनी दी जा चुकी है, जो दिल, फेफड़ों और मस्तिष्क के लिए बेहद नुकसानदेह मानी जाती है। अब वैज्ञानिकों की एक नई रिपोर्ट ने एक और गंभीर चिंता सामने रखी है। अध्ययन के मुताबिक, दिल्ली में पीएम 2.5 प्रदूषण का लगभग एक-तिहाई हिस्सा सेकेंडरी अमोनियम सल्फेट से बना है, जो स्वास्थ्य के लिए कहीं अधिक खतरनाक साबित हो सकता है।
अमोनियम सल्फेट क्यों है खतरनाक?
फिनलैंड के थिंक-टैंक सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के विश्लेषण के अनुसार, अमोनियम सल्फेट एक सेकेंडरी इनऑर्गेनिक एरोसोल है, जो सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) के ऑक्सीडेशन से बनता है। यह प्रदूषक मुख्य रूप से कोयला आधारित बिजली संयंत्रों, औद्योगिक गतिविधियों और कृषि कार्यों से निकलता है।
चिंताजनक बात यह है कि भारत दुनिया में SO₂ का सबसे बड़ा उत्सर्जक है, जिससे इस तरह के खतरनाक कणों का निर्माण और बढ़ जाता है।
सेहत पर गंभीर असर
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, पीएम 2.5 पहले से ही फेफड़ों और रक्तप्रवाह में प्रवेश कर कई बीमारियों का कारण बनता है, लेकिन अमोनियम युक्त पीएम 2.5 इससे भी अधिक घातक हो सकता है। शोध बताते हैं कि इससे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, हृदय रोग और समय से पहले मृत्यु का खतरा बढ़ सकता है।
इसके संपर्क में आने से आंखों और त्वचा में जलन, सांस की नली में सूजन, और पाचन संबंधी समस्याएं जैसे मतली, उल्टी, दस्त और पेट दर्द हो सकते हैं। इसके अलावा, तंत्रिका तंत्र पर असर पड़ने से भ्रम, कंपकंपी और न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का खतरा भी बना रहता है। खासतौर पर अस्थमा और सांस के मरीजों के लिए यह स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है।
कोरोना के बाद सबसे बड़ा स्वास्थ्य संकट
विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना महामारी के बाद वायु प्रदूषण भारत के लिए सबसे बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बनकर उभर रहा है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में सांस से जुड़ी बीमारियों का बोझ स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी दबाव डाल सकता है।
विशेषज्ञों ने लोगों से सावधानी बरतने, मास्क के उपयोग, घर के अंदर एयर प्यूरीफायर लगाने और प्रदूषण नियंत्रण के लिए सख्त नीतियों की मांग पर ज़ोर दिया है













