फाजिल्का, 6 नवंबर 2025
Punjab Desk: जिला प्रशासन फाजिल्का की ओर से जहां लोगों को पराली में आग लगाने की बजाय खेतों में उसे बहाने या गट्ठा बनाकर जमीन से निकालने के बाद बुआई करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, वहीं जिले के अबोहर ब्लॉक के गांव पट्टी सदीक के एक अग्रणी किसान और स्टेट अवार्डी गुरप्रीत सिंह भी अपने गांववासियों और जिलेवासियों को पराली में आग न लगाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। वह अपने 7 एकड़ खेत में कटाई के बाद धान की पराली को बेलर मशीन के जरिए गट्ठे बनाकर बाहर निकालकर गेहूं की बुआई करते हैं।
अग्रणी किसान गुरप्रीत सिंह ने बताया कि वह पिछले लगभग 5 वर्षों से अपनी धान और गेहूं की फसल की पराली में आग नहीं लगाते। उन्होंने कहा कि वह पराली के गट्ठे बनाकर फैक्ट्री में भेज देते हैं। किसान ने बताया कि पराली में आग लगाने से न केवल पर्यावरण प्रदूषित होता है बल्कि कई सड़क दुर्घटनाएं भी होती हैं। हमें सभी को अपनी पराली में आग न लगाकर गट्ठा बनाकर खेतों में बाहर निकालना चाहिए। इस तरह करने से हमारी जमीन की उपजाऊ शक्ति बढ़ेगी, मिट्टी के जीवित कीड़े नष्ट नहीं होंगे और हमारी अगली फसल का उत्पादन भी बढ़ेगा।
किसान ने आगे बताया कि उन्होंने गेहूं और धान की फसल के अलावा 10 एकड़ में टपका सिंचाई के माध्यम से मूंग की खेती भी की है। खेती के अलावा वह डेयरी और मछली पालन के व्यवसाय से भी जुड़े हैं। फसली विविधता अपनाते हुए उन्होंने 2014 से डेयरी विभाग से 45 दिनों का प्रशिक्षण लेकर विभिन्न नस्लों की गायों से डेयरी व्यवसाय शुरू किया। फसल की पराली में आग न लगाने के कारण उन्हें राज्य और जिला स्तर के कार्यक्रमों में सम्मानित भी किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि वह पिछले कई वर्षों से कृषि विज्ञान केंद्र, डॉ. अरविंद अहिलावत के संपर्क में हैं और उनसे आधुनिक कृषि पद्धतियों के बारे में जानकर आधुनिक खेती को अपनाया है।













