UGC के नए नियमों पर सरकार बैकफुट पर, कानूनी सलाह के बीच सुप्रीम कोर्ट में बढ़ीं याचिकाएं

27 जनवरी, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

National Desk:  यूजीसी (UGC) के नए नियमों को लेकर देशभर में विवाद लगातार गहराता जा रहा है। बढ़ते विरोध और कानूनी चुनौतियों के बीच केंद्र सरकार अब बैकफुट पर नजर आ रही है। सरकार ने इन नियमों के हर पहलू पर विचार-विमर्श शुरू कर दिया है और इस संबंध में अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कानूनी सलाह ली है।

दरअसल, यूजीसी के 2026 के नए नियमों में जाति आधारित भेदभाव की शिकायत निवारण प्रक्रिया को केवल अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) तक सीमित किया गया है। इसी प्रावधान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आलोचकों का कहना है कि इससे अन्य वर्गों को बाहर कर दिया गया है, जो संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।

इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में अब तक एक दर्जन से ज्यादा याचिकाएं और आवेदन दायर किए जा चुके हैं। याचिकाओं में तर्क दिया गया है कि यह नियम संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 का उल्लंघन करता है, क्योंकि इसमें समानता और न्याय के अधिकार को सीमित किया गया है। सरकार ने इन कानूनी चुनौतियों को देखते हुए सॉलिसिटर जनरल से सुप्रीम कोर्ट के जातिगत भेदभाव से जुड़े पूर्व फैसलों पर भी चर्चा की है।

यूजीसी नियमों के खिलाफ देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन भी शुरू हो चुके हैं। शिक्षा जगत से जुड़े संगठनों और सामाजिक समूहों का कहना है कि नियमों में बदलाव कर सभी वर्गों को समान शिकायत निवारण का अधिकार मिलना चाहिए।

इस विवाद में मशहूर कवि और वक्ता कुमार विश्वास भी कूद पड़े हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए यूजीसी के नियमों का विरोध किया और ‘UGC RollBack’ हैशटैग का इस्तेमाल किया। उनकी पोस्ट के बाद यह मुद्दा और ज्यादा चर्चा में आ गया है।

फिलहाल, केंद्र सरकार नए यूजीसी नियमों को लेकर सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार कर रही है। सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिकाओं और बढ़ते विरोध को देखते हुए आने वाले दिनों में सरकार की ओर से कोई बड़ा फैसला लिया जा सकता है।