24 फरवरी 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
Business Desk: अगर आप इमरजेंसी में गोल्ड लोन लेने की योजना बना रहे हैं, तो केवल ब्याज दर ही नहीं बल्कि Reserve Bank of India की लेटेस्ट गोल्ड लोन गाइडलाइंस, LTV लिमिट, एलिजिबिलिटी और वैल्यूएशन नियम समझना बेहद जरूरी है, क्योंकि इन्हीं के आधार पर तय होता है कि आपको कितना लोन मिलेगा और किन शर्तों पर मिलेगा। RBI के अनुसार, गोल्ड लोन केवल गोल्ड ज्वेलरी और सीमित मात्रा में सोने के सिक्कों पर ही दिया जा सकता है, जबकि गोल्ड बार, गोल्ड बिस्किट और गोल्ड ETF के बदले लोन की अनुमति नहीं है, क्योंकि इन्हें प्राइमरी गोल्ड माना जाता है। एक व्यक्ति अधिकतम 1 किलो (125 सॉवरेन) तक के गोल्ड ऑर्नामेंट्स गिरवी रख सकता है और मौजूदा दरों पर 75% LTV के हिसाब से सैद्धांतिक रूप से करीब 1.37 करोड़ रुपये तक का लोन संभव है, हालांकि कई बैंक अपनी आंतरिक सीमा तय करते हैं, जैसे State Bank of India अधिकतम 50 लाख रुपये तक गोल्ड लोन देता है। RBI ने LTV को स्लैब में बांटा है, जिसमें 2.5 लाख रुपये तक के लोन पर 85%, 2.5 से 5 लाख रुपये तक 80% और 5 लाख से ज्यादा पर 75% LTV लागू होता है। लेंडर सोने की वैल्यू उसकी शुद्धता (कैरेट) और बाजार भाव के आधार पर तय करते हैं, जिसमें केवल सोने की आंतरिक कीमत जोड़ी जाती है, न कि जेम्स या अन्य सजावटी तत्वों की। नियमों के मुताबिक, गिरवी रखे गए सोने की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी लेंडर की होती है और नुकसान, वजन या शुद्धता में कमी होने पर उचित मुआवजा देना अनिवार्य है। इतना ही नहीं, यदि पूरी पेमेंट के बाद लेंडर सोना लौटाने में देरी करता है, तो तय समय के बाद बॉरोअर को प्रति दिन 5,000 रुपये का हर्जाना देना होगा। इस तरह, गोल्ड लोन आसान विकल्प जरूर है, लेकिन नियमों की सही जानकारी होने पर ही आप इसका पूरा फायदा सुरक्षित तरीके से उठा सकते हैं।













