24 दिसंबर, 2025 फैक्ट रिकॉर्डर
Lifestyle Desk: कश्मीर की ठंडी वादियों में सदियों से पहना जाने वाला कश्मीरी फेरन अब सिर्फ पारंपरिक पोशाक नहीं रह गया है, बल्कि यह आज देशभर में विंटर फैशन का अहम हिस्सा बन चुका है। पहले फेरन का इस्तेमाल केवल ठंड से बचाव के लिए किया जाता था, लेकिन समय के साथ इसके डिजाइन, रंग और कढ़ाई में आए बदलावों ने इसे स्टाइल स्टेटमेंट बना दिया है। अब यह दिल्ली से लेकर हैदराबाद तक महिलाओं की पसंद बन रहा है। फेरन की सबसे बड़ी खासियत इसकी ढीली और आरामदायक बनावट है, जो शरीर को पूरी तरह ढककर गर्माहट देती है। पारंपरिक रूप से यह ऊनी कपड़े से बनाया जाता था, लेकिन अब कश्मीरी ऊन, वेलवेट, ट्वीड और फाइन वूल जैसे फैब्रिक का भी इस्तेमाल होने लगा है, जिससे यह हल्का और ज्यादा ट्रेंडी हो गया है।
फेरन को खास बनाती है उस पर की जाने वाली कश्मीरी कढ़ाई, जिसमें सोजनी, अरी और तिल्ला वर्क प्रमुख हैं। हाथ से की गई यह बारीक कारीगरी न सिर्फ फेरन की खूबसूरती बढ़ाती है, बल्कि कश्मीर की समृद्ध कला और संस्कृति को भी दर्शाती है। एक साधारण फेरन कुछ घंटों में तैयार हो जाता है, जबकि भारी कढ़ाई वाले फेरन को बनाने में कई दिन या हफ्तों तक का समय लग सकता है। यही वजह है कि आज कश्मीरी फेरन ट्रेडिशनल से ट्रेंडी बनकर फैशन डिजाइनर्स के विंटर कलेक्शन और आम लोगों की अलमारी का हिस्सा बन चुका है।













