‘धड़क-2’ से ‘वॉर-2’ तक: अगस्त में सीक्वल्स की बहार, जादू चलेगा?

‘धड़क-2’ से ‘वॉर-2’ तक: अगस्त में सीक्वल्स की बहार, जादू चलेगा?

29 जुलाई 2025 फैक्टर रिकॉर्डर

Bollywood Desk: अगस्त में हिंदी सिनेमा में चार बड़ी सीक्वल फिल्में रिलीज होने जा रही हैं — ‘वॉर 2’, ‘सन ऑफ सरदार 2’, ‘धड़क 2’ और ‘अंदाज 2’। इनमें से कुछ फिल्मों की कहानी पिछले पार्ट से जुड़ी है, जबकि कुछ सिर्फ नाम के आधार पर सीक्वल कही जा रही हैं। इस बात को लेकर दर्शकों के बीच सवाल उठता है कि क्या ये सीक्वल्स वाकई दर्शकों के दिलों में उतर पाएंगे या सिर्फ एक सुरक्षित ट्रेड फॉर्मूला बन गए हैं।

इस सवाल के जवाब के लिए अमर उजाला ने ट्रेड एक्सपर्ट्स सुमित काडेल और अतुल मोहन से चर्चा की।

सीक्वल का नाम ही टिकट नहीं बेचता – सुमित काडेल:
सुमित काडेल का कहना है कि सीक्वल्स का ट्रेंड नया नहीं है। ‘मुन्नाभाई’, ‘धूम’, ‘हेरा फेरी’, ‘कृष’ और ‘वेलकम’ जैसी फिल्मों की अगली कड़ियां दर्शकों को पसंद आई हैं, लेकिन हर फिल्म को यह सफलता नहीं मिलती। एक सीक्वल तभी काम करता है जब उसकी पहली फिल्म दर्शकों के दिलों में गहराई से बैठी हो। केवल नाम या ब्रांड से फिल्म सफल नहीं होती क्योंकि आज का ऑडियंस समझदार हो चुका है और सिर्फ टाइटल देखकर टिकट नहीं खरीदता।

‘धड़क 2’ और ‘सन ऑफ सरदार 2’ की सफलता पर संशय:
सुमित का मानना है कि ‘धड़क 2’ और ‘सन ऑफ सरदार 2’ की सफलता को लेकर संशय है। ‘धड़क’ को थिएटर में सीमित सफलता मिली थी और असली लोकप्रियता टीवी और ओटीटी पर मिली। अब इसका सीक्वल नए डायरेक्टर और नई कास्ट के साथ आ रहा है, जिससे स्टार पावर कमजोर हो सकती है। वहीं, ‘सन ऑफ सरदार’ का पहला पार्ट भी औसत था, इसलिए इसका सीक्वल बनाना दर्शकों के लिए आकर्षक नहीं लग रहा।

सीक्वल्स भरोसेमंद लेकिन सबके लिए नहीं – अतुल मोहन:
ट्रेड एक्सपर्ट अतुल मोहन के अनुसार, कई फिल्मों के सीक्वल्स ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार काम किया है क्योंकि वे एक ब्रांड बन जाते हैं और दर्शकों को पता होता है कि उन्हें क्या देखने को मिलेगा। लेकिन आज के दौर में कलाकार भी वही करते हैं जो पहले काम कर चुका हो ताकि करियर पर बुरा असर न पड़े। नई फिल्म बनाना जोखिम भरा होता है, जबकि फ्रेंचाइजी फिल्में पहले से ट्रेंडेड होती हैं, इसलिए मेकर्स इसे सुरक्षित मानते हैं। हालांकि, क्रिएटिव लोग रिस्क लेने से नहीं डरते।

‘अंदाज 2’ में नई कहानी – सुनील दर्शन:
फिल्मकार सुनील दर्शन कहते हैं कि ‘अंदाज 2’ पूरी तरह नई कहानी है, जो पहली फिल्म के इमोशंस को नए अंदाज में दर्शाती है। यह सिर्फ नाम के आधार पर नहीं बनाई गई बल्कि एक फ्रेश स्क्रिप्ट पर आधारित है। उन्होंने कहा कि फिल्म का नाम और कहानी दोनों मेल खाते हैं और यह पहली फिल्म का सीधा सीक्वल नहीं है।

ओटीटी की भूमिका और दर्शकों की बदलती सोच:
सुमित काडेल के अनुसार, अब ओटीटी और सैटेलाइट पर फिल्म की पॉपुलैरिटी भी सीक्वल की वैल्यू तय करती है। यदि पहला पार्ट डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सफल नहीं होता, तो अगली फिल्म की वैल्यू भी कम हो जाती है। सुनील दर्शन भी मानते हैं कि आज के दर्शक सिर्फ नाम नहीं देखते, बल्कि कंटेंट पर ध्यान देते हैं और पूछते हैं, “इसमें नया क्या है?”

निष्कर्ष:
अगस्त में आने वाली ये चार सीक्वल फिल्में दर्शकों के लिए एक बड़ा सवाल लेकर आई हैं — क्या वे सिर्फ ब्रांड के सहारे सफल होंगी या अपनी कहानी और प्रस्तुति से दर्शकों को बांध पाएंगी। ट्रेड एक्सपर्ट्स की राय में सफलता का राज कहानी, कास्टिंग और दर्शकों से जुड़ाव में छुपा है, न कि सिर्फ नाम में।