02 जनवरी, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
Health Desk: आंखों की गंभीर बीमारी ग्लूकोमा, जो समय पर इलाज न मिलने पर रोशनी छीन सकती है, अब भारत में नई तकनीक से और सटीक तरीके से ठीक की जा सकेगी। दिल्ली कैंट स्थित आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल) के डॉक्टरों ने देश में पहली बार 3D तकनीक की मदद से ग्लूकोमा की सर्जरी कर बड़ी चिकित्सा उपलब्धि हासिल की है।
अस्पताल के नेत्र रोग विभाग के अनुसार, डॉक्टरों ने 3D फ्लेक्स एक्वियस एंजियोग्राफी के साथ iStent तकनीक का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया। इस उन्नत तकनीक से आंख के भीतर तरल पदार्थ (फ्लूइड) के बहाव को बेहद साफ और सीधे तौर पर देखा जा सकता है, जिससे सर्जरी ज्यादा सटीक और सुरक्षित बन जाती है।
कैसे काम करती है नई 3D तकनीक?
यह प्रक्रिया आधुनिक 3D माइक्रोस्कोप और एडवांस इमेजिंग सिस्टम की मदद से की गई।
इसमें कम चीरे वाली सर्जरी (Minimally Invasive Surgery) होती है
मरीज को कम दर्द होता है
रिकवरी तेजी से होती है
आंखों की रोशनी बचने की संभावना बढ़ जाती है
क्या है ग्लूकोमा और क्यों है खतरनाक?
ग्लूकोमा एक ऐसी बीमारी है जिसमें आंख के अंदर दबाव बढ़ने से धीरे-धीरे ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचता है। इसकी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती चरण में इसके लक्षण नजर नहीं आते, जिससे मरीज देर से इलाज के लिए पहुंचते हैं और रोशनी जाने का खतरा बढ़ जाता है।
इलाज में बनेगा नया मानक
आर्मी हॉस्पिटल के डॉक्टरों का कहना है कि भारत में पहली बार इस तकनीक के इस्तेमाल से ग्लूकोमा ट्रीटमेंट में एक नया बेंचमार्क स्थापित हुआ है। यह उपलब्धि न केवल चिकित्सा जगत के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि सैनिकों और उनके परिवारों की आंखों की सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम मानी जा रही है।













