फ्लाइट लेट या बिना सूचना कैंसिल? DGCA के नियम बताते हैं कैसे मिलेगा मुआवजा और रिफंड

09 दिसंबर, 2025 फैक्ट रिकॉर्डर

Business Desk: क्वायरमेंट (CAR) के तहत लागू किया जाता है। अगस्त 2019 में फ्लाइट लेट होने, कैंसिलेशन या ओवरबुकिंग की स्थिति में यात्रियों के मुआवजे से जुड़े नियम और अधिक सख्त किए गए। ये नियम सभी भारतीय घरेलू उड़ानों और भारत से उड़ान भरने वाली सभी अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स पर लागू होते हैं।

अगर कोई फ्लाइट प्लान के अनुसार नहीं चलती, तो एयरलाइन को यात्रियों को या तो मुआवजा देना होगा या उन्हें वैकल्पिक यात्रा विकल्प उपलब्ध कराना होगा। मुआवजे की राशि इस बात पर निर्भर करती है कि देरी कितनी है और कैंसिलेशन की जानकारी कितनी पहले दी गई।

फ्लाइट लेट होने पर
यदि यात्री समय पर चेक-इन कर चुके हों और फ्लाइट निर्धारित समय से लेट हो जाए, तो एयरलाइंस को वेटिंग पैसेंजर्स को भोजन और रिफ्रेशमेंट उपलब्ध कराने होंगे।

  • 2 घंटे की देरी – शॉर्ट रूट

  • 3 घंटे – मीडियम रूट

  • 4 घंटे – लॉन्ग रूट

6 घंटे से अधिक देरी पर 6 घंटे के अंदर दूसरी फ्लाइट या पूरा रिफंड देना अनिवार्य है। रात 8 बजे से 3 बजे के बीच उड़ानों की 6 घंटे से अधिक देरी पर होटल व्यवस्था भी जरूरी है।

कैंसिलेशन पर
एयरलाइन को कम से कम 2 हफ्ते पहले जानकारी देनी होती है। यदि समय पर सूचना नहीं दी गई, तो यात्री को मुआवजे के साथ पूरा रिफंड या वैकल्पिक फ्लाइट का विकल्प मिलता है। मुआवजा इस प्रकार है:

  • 1 घंटे तक की उड़ान: ₹5000

  • 2 घंटे तक: ₹7500

  • 2 घंटे से अधिक: ₹10000

ओवरबुकिंग में
सीट न मिलने पर 200%–400% तक फेयर + फ्यूल चार्ज के बराबर मुआवजा मिलता है।

यात्री अपने टिकट, बोर्डिंग पास और खर्चों की रसीदें सुरक्षित रखकर एयरलाइन या एयर सेवा पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर मुआवजा क्लेम कर सकते हैं।