18 फरवरी 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
National Desk: एक समय था जब फैटी लिवर की समस्या 40–50 साल की उम्र में ज्यादा देखी जाती थी, लेकिन अब 20–30 साल के युवा और यहां तक कि बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, बदलती खानपान की आदतें इस बढ़ती समस्या की सबसे बड़ी वजह हैं। खास बात यह है कि अब बिना शराब पीने वाले लोगों में भी फैटी लिवर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
दिल्ली एमसीडी के डॉ. अजय कुमार के मुताबिक, रोजमर्रा की थाली में शामिल कुछ चीजें सीधे तौर पर लिवर में फैट जमा करने का कारण बन रही हैं।
किन खानपान की आदतों से बढ़ रहा खतरा?
मैदा से बनी चीजें: बाहर मिलने वाली रोटियां, नान, पिज्जा-बर्गर आदि में मैदा अधिक होता है, जो लिवर पर असर डालता है।
कोल्ड ड्रिंक और मीठे पेय: ज्यादा शुगर लिवर में फैट जमा करने लगती है।
तला-भुना और प्रोसेस्ड फूड: जंक फूड और डीप फ्राइड चीजें फैटी लिवर के खतरे को बढ़ाती हैं।
बार-बार बाहर का खाना: हाई कैलोरी और कम पोषण वाली डाइट लिवर के लिए हानिकारक है।
फैटी लिवर क्या है?
जब लिवर में जरूरत से ज्यादा चर्बी जमा होने लगती है, तो उसे फैटी लिवर कहा जाता है। जो लोग शराब नहीं पीते, उनमें इसे नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) कहा जाता है।
फैटी लिवर के कई स्टेज होते हैं:
ग्रेड 1
ग्रेड 2
लिवर फाइब्रोसिस
लिवर सिरोसिस (सबसे गंभीर अवस्था)
लिवर सिरोसिस की स्थिति में लिवर ट्रांसप्लांट तक की जरूरत पड़ सकती है।
शुरुआती लक्षण क्या हैं?
शुरुआत में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते, लेकिन धीरे-धीरे ये संकेत नजर आ सकते हैं:
लगातार थकान
पेट के दाहिने हिस्से में हल्का दर्द
वजन बढ़ना
सुस्ती महसूस होना
ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। शुरुआती अवस्था में बीमारी को कंट्रोल करना आसान होता है।
बचाव कैसे करें?
✔ हरी सब्जियां और फल नियमित रूप से खाएं
✔ रोज कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें
✔ वजन नियंत्रित रखें
✔ शुगर और ट्राइग्लिसराइड की नियमित जांच कराएं
✔ जंक फूड और मीठे पेय से दूरी बनाएं
स्वस्थ लिवर के लिए आपकी थाली का संतुलित होना बेहद जरूरी है। सही खानपान और नियमित व्यायाम से कम उम्र में बढ़ रहे फैटी लिवर के खतरे को काफी हद तक रोका जा सकता है।











