02 फरवरी 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
Punjab Desk: पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने केंद्रीय बजट 2026 को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने एक बार फिर पंजाब और हरियाणा के किसानों की जायज चिंताओं को नजरअंदाज किया है, जिससे उसके किसान-हितैषी होने के दावों की पोल खुल गई है।
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि बजट में न तो कृषि आधारभूत ढांचा फंड में कोई बढ़ोतरी की गई और न ही मंडियों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए कोई ठोस प्रावधान किया गया। इससे कृषि प्रधान राज्यों को अपने भरोसे छोड़ दिया गया है। उन्होंने कहा कि पंजाब का किसान देश की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ है, इसके बावजूद केंद्र सरकार उन व्यवस्थाओं में निवेश करने से लगातार बच रही है, जो देश का पेट भरने वाले किसानों के लिए जरूरी हैं।
वित्त मंत्री ने बजट में उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा देने के चयनात्मक दृष्टिकोण की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि नारियल, काजू, चंदन और ड्राई फ्रूट्स जैसी फसलों का जिक्र तो किया गया, लेकिन उत्तर भारत के उन किसानों के लिए कुछ भी नहीं है, जो अपनी कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप फसलें उगाते हैं। यह बजट केंद्र के पक्षपातपूर्ण रवैये और अनाज उत्पादक राज्यों, खासकर पंजाब के किसानों के प्रति उदासीनता को साफ तौर पर दर्शाता है।
चीमा ने यूरिया सब्सिडी में कटौती पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि यूरिया सब्सिडी को पिछले साल के 1,26,475 करोड़ रुपये से घटाकर 1,16,805 करोड़ रुपये कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि महंगाई के इस दौर में आम आदमी को टैक्स में कोई राहत नहीं दी गई, उल्टा सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ाकर आम जनता पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया गया है। लंबी अवधि के पूंजी लाभ पर भी कोई राहत नहीं दी गई है।
रक्षा बजट को लेकर उन्होंने निराशा जताते हुए कहा कि पाकिस्तान के साथ हालिया तनाव को देखते हुए रक्षा उत्पादन और रक्षा बजट में बड़े ऐलान की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि बजट भाषण में रक्षा का जिक्र महज चार बार किया गया।
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना पर बोलते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पारंपरिक कारीगरों और दस्तकारों को सशक्त बनाने के लिए शुरू की गई इस योजना का बजट 5,100 करोड़ रुपये से घटाकर 3,861 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो सरकार के अपने दावों के विपरीत है।
16वें वित्त आयोग को लेकर उन्होंने कहा कि वर्टिकल डिवोल्यूशन को 41 प्रतिशत पर ही रखा गया है और राज्यों की बिगड़ती वित्तीय स्थिति के बावजूद इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं की गई। उन्होंने बताया कि पंजाब को इस बार न तो मालिया घाटा अनुदान मिला और न ही आपदा प्रबंधन से जुड़ी शर्तों में कोई राहत दी गई।
शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर भी वित्त मंत्री ने बजट को निराशाजनक बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा बजट में 10 प्रतिशत से भी कम बढ़ोतरी हुई है, जबकि आयुष्मान भारत योजना के बजट में कोई इजाफा नहीं किया गया। स्वच्छ भारत मिशन का बजट आधा कर दिया गया है।
अंत में हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि यह बजट दक्षिणी और उत्तर-पूर्वी राज्यों पर ज्यादा केंद्रित है, जबकि पंजाब और पूरे उत्तर भारत को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है। किसानों, युवाओं और रोजगार को लेकर इस बजट में कुछ भी ठोस नहीं है, जो इसे आम जनता के लिए निराशाजनक बनाता है।













