ज़िला लोक संपर्क अधिकारी, संगरूर
– धान की कम समय लेने वाली किस्मों और मिट्टी-पानी जांच से जुड़ी दी गई जानकारी
संगरूर, 07 मई, 2025 Fact Recorder
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना के निदेशक विस्तार शिक्षा के निर्देशों के तहत फार्म सलाहकार सेवा केंद्र, संगरूर द्वारा गांव घनौर कलां में धान की कम समय लेने वाली किस्मों और मिट्टी परीक्षण के आधार पर रासायनिक खादों से संबंधित किसानों के लिए प्रशिक्षण कैंप आयोजित किया गया।
कैंप की अध्यक्षता करते हुए डॉ. अशोक कुमार, ज़िला विस्तार वैज्ञानिक (मृदा विज्ञान) ने किसानों को धान की नई किस्म PR 132 के बारे में बताया जो सिर्फ डेढ़ बोरी प्रति एकड़ यूरिया खाद से उगाई जा सकती है। उन्होंने कम समय की प्रचलित किस्म PR 126 के बारे में भी जानकारी दी और किसानों को इसे 15 जुलाई से पहले रोपने की सलाह दी। इसके अलावा उन्होंने PR 131, PR 128 और पूसा बासमती 1509 की खेती के तरीकों के बारे में भी जानकारी साझा की।
डॉ. अशोक ने किसानों को मिट्टी परीक्षण के आधार पर ही खरीफ सीजन में खाद डालने के लिए जागरूक किया और मिट्टी और पानी के नमूने लेने की विधियों के बारे में भी विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि धान में यूरिया का संयम से प्रयोग करें, बुवाई से पहले यूरिया ड्रिल न करें और इसे तीन किस्तों में डालें।
बासमती में झंडा रोग से बचाव के लिए बीज शोधन की आवश्यकता और पशुओं की सेहत सुधार से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा की गई। उन्होंने मिट्टी की जैविक सेहत बढ़ाने के लिए धान और बासमती की पौध को जीवाणु खाद के टीके (एज़ोस्पाइरिलम) लगाने की सलाह दी और बताया कि इससे जमीन की सेहत सुधरती है और उत्पादन में भी बढ़ोतरी होती है।












