चंडीगढ़, 14 मार्च 2026 Fact Recorder
Haryana Desk : हरियाणा राइट टू सर्विस कमीशन ने फरीदाबाद की भावना गुप्ता और अमनदीप से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि संबंधित भूमि पर वर्ष 2009 से माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों के तहत स्थगन (स्टे) लागू है। इसके बावजूद हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी ) द्वारा 18 जनवरी, 2023 और 22 मार्च, 2023 को उक्त प्लॉट्स की नीलामी कर दी गई। आयोग ने इस स्थिति को गंभीर मानते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया यह न्यायालय की अवमानना के साथ-साथ धोखाधड़ी से संबंधित दंडात्मक प्रावधानों के अंतर्गत भी आ सकता है।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि यदि किसी निजी कॉलोनाइजर द्वारा बिना वैध स्वामित्व के प्लॉट बेचा जाता, तो उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाती। आयोग ने यह भी उल्लेख किया कि इस मामले के तथ्य संजीव वर्मा और हिमांशु शर्मा से संबंधित पूर्व मामलों के समान हैं, जिनका निपटारा आयोग द्वारा 19 फरवरी, 2026 को किया जा चुका है।
इसी आधार पर आयोग ने वर्तमान संशोधन याचिकाओं का निपटारा करते हुए हरियाणा राइट टू सर्विस एक्ट की धारा 17(1)(ह) के तहत दोनों रिवीजनिस्ट्स को 5,000-5,000 रुपये का मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने एचएसवीपी को आदेश दिया है कि यह राशि 15 दिनों के भीतर अदा की जाए और 30 मार्च, 2026 तक इसकी अनुपालना रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि एचएसवीपी प्रारंभ में यह राशि अपने फंड से दे सकता है, जिसे बाद में जांच के बाद दोषी अधिकारियों से वसूल किया जा सकता है।
साथ ही आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि आवेदक यदि चाहें तो मानसिक पीड़ा, आर्थिक नुकसान और अन्य परेशानियों के लिए अधिक मुआवजे की मांग हेतु उपभोक्ता फोरम, माननीय उच्च न्यायालय या किसी अन्य सक्षम प्राधिकरण का रुख कर सकते हैं। आयोग ने कहा कि चूंकि मामला न्यायालय में लंबित है, इसलिए वर्तमान परिस्थितियों में प्लॉट का कब्जा सुनिश्चित कराना संभव नहीं है। आयोग ने उम्मीद जताई कि एचएसवीपी इस मामले को कानूनी रूप से उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए प्रयास जारी रखेगा।













