23 मार्च 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
International Desk: मध्य पूर्व में स्थित Strait of Hormuz को लेकर बढ़ता सैन्य तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस समुद्री मार्ग में किसी तरह का सैन्य टकराव होता है, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।
दुनिया की तेल सप्लाई का अहम रास्ता
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। वैश्विक स्तर पर लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है। यदि यहां सैन्य गतिविधियां बढ़ती हैं या रास्ता बाधित होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है।
विश्लेषकों का अनुमान है कि ऐसी स्थिति में कच्चे तेल की कीमतें 150 से 200 डॉलर प्रति बैरल या उससे भी अधिक तक पहुंच सकती हैं, जिससे पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर सीधा असर पड़ेगा।
शेयर बाजार पर भी पड़ सकता है असर
वैश्विक तनाव की स्थिति में निवेशक आमतौर पर जोखिम भरे निवेश से दूरी बनाते हैं। ऐसे में शेयर बाजारों में गिरावट देखने को मिल सकती है। दूसरी ओर, सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने की मांग बढ़ सकती है, जिससे इसकी कीमतों में तेजी आ सकती है।
भारत पर संभावित प्रभाव
India अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है और मध्य पूर्व से आने वाला तेल काफी हद तक इसी मार्ग से गुजरता है। यदि इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, तो भारत में ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं और महंगाई पर दबाव पड़ सकता है।
इसके अलावा खाड़ी देशों में काम कर रहे लाखों भारतीयों और वहां से आने वाले रेमिटेंस पर भी अप्रत्यक्ष असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
वैश्विक व्यापार और शिपिंग पर असर
यदि समुद्री मार्ग असुरक्षित होता है, तो शिपिंग कंपनियों के लिए बीमा लागत बढ़ सकती है और कई जहाज इस रास्ते से गुजरने से बच सकते हैं। इससे वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है और कई देशों में जरूरी वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं।
निष्कर्ष
विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति फिलहाल संभावनाओं और कूटनीतिक प्रयासों पर निर्भर है। यदि तनाव कम नहीं हुआ, तो इसका असर केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ सकता है। इसलिए दुनिया की नजरें इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर बनी हुई हैं।













