पंजाबी लोक विरासत अकादमी के चेयरमैन प्रो. गुरभजन सिंह गिल ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है।
लुधियाना, 24 सितंबर 2025 फैक्ट रिकॉर्डर
Punjab Desk: उभरते पंजाबी चिंतक और प्रो. किशन सिंह के शिष्य प्रो. गुरमीत सिंह टिवाना का निधन आज कनाडा के शहर अब्बॉट्सफ़ोर्ड में हो गया। यह जानकारी उनके निकटवर्ती भूपिंदर मल्ही ने दी।
प्रो. गुरमीत सिंह टिवाना ने लाजपत राय सरकारी कॉलेज ढुड्डीके (मोगा) में लंबे समय तक पढ़ाया। सेवा मुक्त होने के बाद वे कनाडा चले गए।
उनकी कुछ महत्वपूर्ण कृतियाँ हैं:
धर्म बनाम मार्क्सवाद (वर्तमान, चेतना प्रकाशन, लुधियाना, 2005)
अखी डिट्ठा समाजवादी क्यूबा (वर्तमान, तर्कभारती प्रकाशन, बर्नाला, 2005)
इतिहास मुझे सही साबित करेगा (फिदेल कास्त्रो का लंबा भाषण, अनुवाद, तर्कभारती प्रकाशन, बर्नाला, 2005)
इस समय उनकी उम्र लगभग 95 वर्ष थी।
पंजाबी लोक विरासत अकादमी के चेयरमैन प्रो. गुरभजन सिंह गिल ने बताया कि लाजपत राय कॉलेज में पढ़ाते हुए 1977-83 के दौरान प्रो. टिवाना, प्रो. सरवन सिंह और अन्य साथियों के साथ बिताए पल याद आते हैं। उन्होंने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
पढ़ाई और साहित्य के प्रति उनके योगदान का परिणाम है कि प्रो. किशन सिंह की सोच को उनके छात्र डॉ. सुखदेव सिंह सिरसा के माध्यम से प्रकाशित करवा रहे हैं। इस प्रक्रिया में अब तक आठ किताबें पंजाबी साहित्य अकादमी, लुधियाना द्वारा प्रकाशित हो चुकी हैं।













