पार्ट-टाइम जॉब और QR कोड स्कैम से 641 करोड़ की ठगी, ED ने दो चार्टर्ड अकाउंटेंट गिरफ्तार

06 मार्च 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

National Desk:  साइबर फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग के बड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कार्रवाई करते हुए दो चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक कुमार शर्मा और भास्कर यादव को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि दोनों ने पार्ट-टाइम जॉब ऑफर, QR कोड स्कैम और फिशिंग जैसे तरीकों से देशभर के लोगों से करीब 641 करोड़ रुपये की ठगी की।

ED के मुताबिक, ठगी से जुटाई गई रकम पहले म्यूल बैंक खातों में डाली जाती थी, जिन्हें टेलीग्राम ग्रुप से जुड़े लोग ऑपरेट करते थे। इसके बाद पैसे को कई शेल कंपनियों के जरिए घुमाकर उसकी असली पहचान छुपाई जाती थी।

जांच में यह भी सामने आया कि रकम को भारत के बैंक डेबिट कार्ड (VISA और MasterCard) के माध्यम से UAE की फिनटेक कंपनी PYYPL के वॉलेट में भेजा जाता था। वहां से पैसे को दुबई में ATM और POS के जरिए निकाला जाता था या फिर क्रिप्टो एक्सचेंज Binance के जरिए क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर अलग-अलग डिजिटल वॉलेट में ट्रांसफर कर दिया जाता था, ताकि पैसों का ट्रेल छुपाया जा सके।

ED की जांच में पता चला कि इस पूरे नेटवर्क को पढ़े-लिखे पेशेवर लोग चला रहे थे। गिरोह में अशोक कुमार शर्मा, भास्कर यादव के अलावा अजय और विपिन यादव भी शामिल थे। इन लोगों ने दिल्ली के बिजवासन इलाके के एक ही पते से 20 से ज्यादा शेल कंपनियां बना रखी थीं, जिनके पार्टनर, मोबाइल नंबर, ई-मेल और KYC दस्तावेज आपस में जुड़े पाए गए।

ED ने 28 नवंबर 2024 को आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान अशोक कुमार शर्मा मौके से फरार हो गया और अधिकारियों से हाथापाई भी की, जिसके बाद उसके खिलाफ कपसहेड़ा थाने में FIR दर्ज की गई। वहीं भास्कर यादव भी छापे की सूचना मिलते ही फरार हो गया था। छापेमारी के दौरान कई ATM कार्ड और चेक बुक भी बरामद किए गए थे।

दोनों आरोपी नवंबर 2024 से फरार थे और गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत की कोशिश कर रहे थे, लेकिन स्पेशल कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। बाद में सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिलने पर दोनों ने कोर्ट में सरेंडर किया, जिसके बाद ED ने उन्हें PMLA की धारा 19 के तहत गिरफ्तार कर लिया।

अब तक इस मामले में 10 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और ED ने करीब 8.67 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की है। एजेंसी की जांच अभी जारी है।