क्या जन्म का महीना मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है? अध्ययन में सामने आई चौंकाने वाली बातें

क्या जन्म का महीना मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है? अध्ययन में सामने आई चौंकाने वाली बातें

02 अगस्त 2025 फैक्ट रिकॉर्डर

Health Desk: मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं आज वैश्विक स्तर पर गंभीर चिंता का विषय बन चुकी हैं। तनाव, चिंता और अवसाद जैसी स्थितियों से हर साल लाखों लोग प्रभावित हो रहे हैं, और खास बात यह है कि अब कम उम्र के युवाओं, यहां तक कि 20 वर्ष से कम आयु वालों में भी इन समस्याओं का बढ़ता प्रकोप देखा जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हर आठवां व्यक्ति किसी न किसी मानसिक समस्या से जूझ रहा है। भागदौड़ भरी जीवनशैली, सोशल मीडिया का दबाव, अकेलापन, आर्थिक अस्थिरता और भावनात्मक असंतुलन जैसी स्थितियां मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं। लेकिन हाल ही में एक शोध में एक नई बात सामने आई है—क्या जन्म का महीना भी मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालता है?

कनाडा स्थित क्वांटलेन पॉलिटेक्निक यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इस पर एक अध्ययन किया, जिसे पल्सवन जर्नल में प्रकाशित किया गया। इसमें यह दावा किया गया कि गर्मियों के महीनों (विशेषकर जून, जुलाई और अगस्त) में जन्मे पुरुषों में डिप्रेशन का खतरा अन्य महीनों में जन्म लेने वालों की तुलना में अधिक हो सकता है। इस शोध के लिए 303 लोगों के सैंपल का अध्ययन किया गया, जिनमें 106 पुरुष और 197 महिलाएं शामिल थीं। प्रतिभागियों की औसत आयु 26 वर्ष थी। डिप्रेशन का मूल्यांकन PHQ-9 स्केल और चिंता का मूल्यांकन GAD-7 स्केल से किया गया।

अध्ययन में सामने आया कि कुल प्रतिभागियों में से 84% में अवसाद और 66% में तनाव के लक्षण देखे गए। हालांकि तनाव के मामले में जन्म के महीने का सीधा संबंध नहीं मिला, लेकिन डिप्रेशन के आंकड़ों में गर्मियों में जन्मे पुरुषों में इस समस्या की संभावना अधिक दिखी। उदाहरण के लिए, गर्मियों में जन्मे 78 पुरुषों में डिप्रेशन के हल्के से लेकर गंभीर स्तर तक के लक्षण पाए गए, जबकि सर्दियों में जन्मे 67, वसंत में 58 और शरद ऋतु में जन्मे 68 लोगों में यह दर कम रही।

अध्ययन की प्रमुख लेखिका अर्शदीप कौर ने कहा कि जन्म के समय की विकासात्मक परिस्थितियां—जैसे प्रकाश की मात्रा, तापमान और गर्भावस्था के दौरान मां का स्वास्थ्य—बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि गर्भावस्था या बचपन में फ्लू जैसी मौसमी बीमारियों के संपर्क में आने से भविष्य में अवसाद जैसी मानसिक स्थितियों का खतरा बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के विकास के प्रारंभिक वर्षों में पर्यावरणीय परिस्थितियां गहरा असर डालती हैं। हालांकि यह शोध सीमित सैंपल साइज पर आधारित है और इसके निष्कर्षों को व्यापक रूप से लागू करने से पहले और अधिक अध्ययन की आवश्यकता है, लेकिन यह निश्चित रूप से मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले कुछ अनदेखे प्रभावों को उजागर करता है।