कनाडा में खालिस्तानी नेटवर्क पर शिकंजा: 3 वजहें, जिनसे तय मानी जा रही है सख्त कार्रवाई

09 फरवरी 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

International Desk:  1) भारत–कनाडा सुरक्षा सहयोग फिर पटरी पर
NSA अजीत डोभाल का कनाडा दौरा और दोनों देशों के लायजन ऑफिसर नियुक्त करने का फैसला बड़ा संकेत है। इससे इंटेलिजेंस शेयरिंग, ड्रग्स/फेंटानिल और संगठित अपराध पर सीधा व तेज़ एक्शन संभव होगा—और इसी दायरे में खालिस्तानी गतिविधियों की निगरानी भी सख़्त होगी।

2) बदलती वैश्विक राजनीति में भारत अहम, कनाडा को कदम उठाने होंगे
नई सरकार के साथ कनाडा भारत से रिश्ते सुधारना चाहता है—रणनीतिक और आर्थिक दोनों मोर्चों पर। भारत की पुरानी और स्पष्ट मांग रही है कि कनाडा की धरती से भारत-विरोधी अलगाववादी गतिविधियों पर रोक लगे। रिश्ते आगे बढ़ाने हैं तो इस मुद्दे पर ठोस कार्रवाई जरूरी है।

3) फंडिंग पर आधिकारिक स्वीकारोक्ति = कानूनी आधार मजबूत
कनाडा सरकार की रिपोर्ट में माना गया कि खालिस्तानी चरमपंथी संगठनों को देश के भीतर से फंडिंग मिलती रही—क्रिप्टो, क्राउड-फंडिंग और कुछ एनजीओ के जरिए। यह स्वीकारोक्ति अब कानूनी/प्रशासनिक कार्रवाई का पुख्ता आधार देती है।

निष्कर्ष:
सुरक्षा सहयोग, कूटनीतिक प्राथमिकताएँ और फंडिंग पर सरकारी मुहर—तीनों मिलकर संकेत दे रहे हैं कि कनाडा में खालिस्तानी नेटवर्क पर नज़र भी सख़्त होगी और कार्रवाई भी