भारतीय नोटों से हटाई जा सकती है गांधी की तस्वीर? राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास का बड़ा दावा

23 दिसंबर, 2025 फैक्ट रिकॉर्डर

National Desk:  मनरेगा का नाम बदले जाने को लेकर विवाद अभी थमा भी नहीं था कि अब केंद्र सरकार पर एक और गंभीर आरोप लगा है। CPI के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने दावा किया है कि भारतीय करेंसी नोटों से महात्मा गांधी की तस्वीर हटाने की तैयारी चल रही है। उनका कहना है कि इस दिशा में शुरुआती स्तर पर योजना बनाई जा चुकी है और गांधी की जगह भारत की विरासत से जुड़े अन्य प्रतीकों को शामिल करने पर चर्चा हो रही है।

जॉन ब्रिटास का यह बयान ऐसे समय आया है, जब इससे पहले रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) कई बार साफ कर चुका है कि भारतीय मुद्रा से महात्मा गांधी की तस्वीर हटाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। इसके बावजूद ब्रिटास ने कहा कि आधिकारिक इनकार के पीछे सच्चाई कुछ और है। उनके मुताबिक, उच्च स्तर पर इस मुद्दे पर पहले दौर की बातचीत हो चुकी है और यह केवल अफवाह नहीं, बल्कि देश के प्रतीकों को दोबारा गढ़ने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा है।

महात्मा गांधी की तस्वीर वर्ष 1996 में ‘महात्मा गांधी सीरीज’ के नोटों के साथ सभी भारतीय बैंकनोट्स पर स्थायी रूप से शामिल की गई थी। साल 2022 में भी जब ऐसी खबरें सामने आई थीं कि नोटों पर अन्य महान हस्तियों की तस्वीर लगाई जा सकती है, तब RBI ने साफ शब्दों में कहा था कि गांधी की तस्वीर को बदलने का कोई विचार नहीं है। उस वक्त यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि रवींद्रनाथ टैगोर या डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जैसे व्यक्तित्वों की तस्वीरों पर विचार हो सकता है, जिसे RBI ने खारिज कर दिया था।

यह नया विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब मनरेगा को बदलकर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी VB-G RAM G बिल लाया गया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार योजनाबद्ध तरीके से महात्मा गांधी का नाम और पहचान सार्वजनिक नीतियों से हटाने की कोशिश कर रही है।

इसके अलावा, जॉन ब्रिटास ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आयोजित टी पार्टी में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी की मौजूदगी की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि रोजगार गारंटी से जुड़े विधेयक के पारित होने के बाद, जिससे गरीब और मजदूर वर्ग प्रभावित होगा, ऐसे समय में प्रधानमंत्री के स्वागत समारोह में प्रियंका गांधी की उपस्थिति लोकतंत्र पर एक धब्बा है।

ब्रिटास ने सवाल उठाया कि प्रियंका गांधी कांग्रेस संसदीय दल में किसी औपचारिक पद पर नहीं हैं, फिर भी वह इस कार्यक्रम में क्यों शामिल हुईं। उन्होंने कहा कि जनविरोधी नीतियों वाली सरकार के प्रति नरम रुख अपनाने से विपक्ष की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचेगा। साथ ही, उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर भविष्य में गांधी की तस्वीर नोटों से हटा भी दी जाती है, तब भी कुछ नेता ऐसे सरकारी आयोजनों में शामिल होते रहेंगे।