05 जनवरी, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
Business Desk: नए साल में उपभोक्ताओं को महंगाई का एक और झटका लग सकता है। एयर कंडीशनर, रसोई के उपकरण, बाथवेयर और तांबे के बर्तन खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों को अब ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है। इसकी मुख्य वजह तांबे और एल्युमीनियम जैसी धातुओं की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी है, जिससे कंपनियों की इनपुट लागत काफी बढ़ गई है।
पिछले महीने वैश्विक बाजार में तांबे की कीमत रिकॉर्ड 12,000 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई, जो 2009 के बाद की सबसे बड़ी वार्षिक वृद्धि मानी जा रही है। इस तेजी का सीधा असर घरेलू उपकरण और उपभोक्ता वस्तुओं के निर्माण पर पड़ा है। कंपनियां मुनाफा बनाए रखने के लिए अब बढ़ी हुई लागत ग्राहकों पर डालने की तैयारी में हैं।
उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक, तांबा और पीतल घरेलू उपकरणों, कुकवेयर और बाथवेयर उत्पादों का अहम कच्चा माल हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर सीधे स्थानीय बाजारों पर पड़ता है। हालिया तेजी से उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं की लागत पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
कुकवेयर ब्रांड वंडरशेफ के सीईओ रवि सक्सेना ने बताया कि तांबे और एल्युमीनियम की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के कारण घरेलू उपकरण और कुकवेयर श्रेणी में 5 से 7 फीसदी तक कीमतें बढ़ाई जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि तांबा न्यूट्री-ब्लेंड और मिक्सर-ग्राइंडर जैसे उत्पादों में प्रमुख रूप से इस्तेमाल होता है और इसकी महंगाई से पूरे उद्योग के मार्जिन प्रभावित हो रहे हैं।
घरेलू बाजार में भी तांबे के दाम तेजी से बढ़े हैं। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर तांबा 1,300 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। पीतल की कीमतों में भी इजाफा हुआ है, जिससे बाथवेयर सेक्टर पर असर पड़ा है। सोमानी बाथवेयर के प्रमुख श्रीवत्स सोमानी के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में पीतल की कीमतों में 15 से 18 फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है और कंपनियों के लिए पूरी लागत खुद वहन करना संभव नहीं रह गया है।
वहीं, गोल्डमैन के विश्लेषकों का कहना है कि आपूर्ति में बाधा, नीतिगत बदलाव और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े बढ़ते खर्च के कारण तांबे की कीमतों में आगे भी मजबूती बनी रह सकती है। अनुमान है कि 2026 की पहली छमाही में लंदन मेटल एक्सचेंज पर तांबे की औसत कीमत 10,710 डॉलर प्रति टन के आसपास रह सकती है।
गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप के बिजनेस हेड कमल नंदी के मुताबिक, एसी श्रेणी में इनपुट लागत 8 से 10 फीसदी तक बढ़ चुकी है, जिसके चलते एयर कंडीशनर की कीमतों में 7 से 8 फीसदी तक इजाफा हो सकता है। कुल मिलाकर आने वाले महीनों में घरेलू उपकरण और रोजमर्रा के इस्तेमाल की कई चीजें महंगी होने की संभावना है।













