2 अप्रैल, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
International Desk: ईरान के साथ जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच अमेरिका की विदेश नीति को लेकर नया विवाद सामने आया है। Donald Trump की नाटो (NATO) से नाराजगी के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio का पुराना बयान फिर चर्चा में आ गया है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, 2023 में Marco Rubio ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि कोई भी अमेरिकी राष्ट्रपति सीनेट की मंजूरी के बिना NATO से बाहर नहीं निकल सकता। उन्होंने उस समय एक कानून का समर्थन किया था, जिसमें राष्ट्रपति के इस अधिकार को सीमित करने की बात कही गई थी।
अब वही पुराना पोस्ट दोबारा वायरल हो गया है, क्योंकि Donald Trump ने संकेत दिए हैं कि ईरान युद्ध के बाद वह नाटो में अमेरिका की भूमिका पर पुनर्विचार कर सकते हैं।
ट्रंप क्यों हैं नाराज?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के खिलाफ मौजूदा संघर्ष में कई यूरोपीय देशों ने अमेरिका को अपेक्षित सैन्य सहयोग नहीं दिया।
- कुछ देशों ने अपने सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी
- हवाई क्षेत्र के उपयोग पर भी पाबंदियां लगाईं
- समुद्री सुरक्षा मिशनों में भी सीमित भागीदारी दिखाई
इन कारणों से Donald Trump ने नाटो सहयोगियों पर नाराजगी जताई और गठबंधन को “कागजी शेर” तक कह दिया।
अब क्या बोले रुबियो?
हाल ही में Marco Rubio ने अपने पुराने रुख पर आंशिक बदलाव के संकेत दिए। उन्होंने कहा कि पहले वह नाटो को अमेरिका की ताकत बढ़ाने वाला मंच मानते थे, लेकिन अब यह “एकतरफा व्यवस्था” जैसा लगने लगा है, जहां जरूरत के समय सहयोग नहीं मिल रहा।
राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज
अमेरिकी सीनेट में डेमोक्रेट नेता Chuck Schumer ने साफ कहा कि नाटो छोड़ने का कोई भी फैसला बिना सीनेट की मंजूरी के संभव नहीं होगा। उन्होंने उस कानून का समर्थन दोहराया, जिसमें ऐसे फैसले के लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी है।
क्यों अहम है यह विवाद?
- नाटो दुनिया का सबसे बड़ा सैन्य गठबंधन है
- अमेरिका इसकी सबसे बड़ी ताकत है
- अगर अमेरिका की भूमिका कमजोर होती है, तो वैश्विक सुरक्षा संतुलन पर असर पड़ सकता है
👉 कुल मिलाकर, Donald Trump की नाराजगी और Marco Rubio के पुराने बयान ने अमेरिका की विदेश नीति और उसके सहयोगी संबंधों पर नई बहस छेड़ दी है।













