चंडीगढ़ के पर्वतारोही विशाल ठाकुर की टीम ने 21,630 फीट मानीरंग चोटी पर फहराया तिरंगा, रचा इतिहास

चंडीगढ़ के पर्वतारोही विशाल ठाकुर की टीम ने 21,630 फीट मानीरंग चोटी पर फहराया तिरंगा, रचा इतिहास

24 सितंबर 2025 फैक्ट रिकॉर्डर 

Himachal Desk:  चंडीगढ़ के पर्वतारोही विशाल ठाकुर ने मानीरंग चोटी पर फहराया तिरंगा, रचा भारतीय पर्वतारोहण में इतिहास                                                                                                          हिमाचल प्रदेश में स्थित मानीरंग चोटी (6,593 मीटर / 21,630 फीट) को चंडीगढ़ के पेशेवर पर्वतारोही विशाल ठाकुर के नेतृत्व में चार सदस्यों की टीम ने सफलतापूर्वक फतह किया। यह ऐतिहासिक उपलब्धि 20 सितंबर को दोपहर 2:26 बजे दर्ज हुई, जब टीम ने शिखर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया।

टीम में विशाल ठाकुर के अलावा अमन चौहान, बृज मोहन केवला और तेजा सिंह शामिल थे। यह अभियान अल्पाइन स्टाइल में किया गया, जिसे पर्वतारोहण की सबसे कठिन और जोखिम भरी शैली माना जाता है। इस शैली में पर्वतारोही पूरी तरह आत्मनिर्भर रहते हैं—कोई पोर्टर, गाइड, कुक या घोड़ा नहीं होता। टीम को अपने सभी उपकरण, भोजन और जरूरी सामान खुद ढोने और तैयार करने पड़ते हैं। यह चुनौतीपूर्ण अभियान केवल 6 दिनों में सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

विशाल ठाकुर ने अगस्त में भी मानीरंग पर चढ़ाई का प्रयास किया था, लेकिन लगातार बारिश और खराब मौसम ने उन्हें रोक दिया। सितंबर में उन्होंने नई टीम का गठन किया और दृढ़ संकल्प के साथ अभियान दोबारा शुरू किया, जिससे उन्हें सफलता मिली।

विशाल ठाकुर पहले भी हिमालय की कई कठिन चोटियों को फतह कर चुके हैं। इनमें ब्लैक पीक, कालिंदी खाल, फ्रेंडशिप पीक, पिन-पार्वती पास, युनम पीक और कनामो पीक शामिल हैं। उनके अनुभव और कड़ी मेहनत ने उन्हें मानीरंग जैसी चुनौतीपूर्ण चोटी पर विजय दिलाई। उनका अगला लक्ष्य हिमाचल प्रदेश की ऊंची चोटी रियो पूर्गिल है।

मानीरंग चोटी की चढ़ाई शारीरिक शक्ति, मानसिक दृढ़ता और तकनीकी कौशल की परीक्षा होती है। हर कदम पर कठिन परिस्थितियों और अप्रत्याशित मौसम से जूझना पड़ता है। टीम लीडर विशाल ठाकुर ने कहा,
“मानीरंग हमारे लिए सिर्फ़ एक चोटी नहीं थी, यह साहस, धैर्य और विश्वास की परीक्षा थी। अगस्त में मौसम ने हमें रोका, लेकिन सितंबर में हमने ठान लिया कि अब पीछे नहीं हटेंगे। अल्पाइन स्टाइल में इसे फतह करना हमारे लिए गर्व का क्षण है।”

इस अभियान के लिए टीम ने इंडियन माउंटेनियरिंग फाउंडेशन (IMF) से अनुमति, एडवेंचर इंश्योरेंस और अन्य आवश्यक परमिट प्राप्त किए।

विशाल ठाकुर और उनकी टीम की यह उपलब्धि भारतीय पर्वतारोहण के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय जोड़ती है और युवाओं को कठिन चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रेरित करती है।