23 फरवरी 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
Education Desk: NEET PG 2025 में माइनस 40 तक स्कोर करने वाले उम्मीदवारों को पीजी मेडिकल कोर्स में एडमिशन देने के नियम को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया है। केंद्र सरकार ने साफ कहा है कि कटऑफ घटाने से न तो डॉक्टरों की योग्यता पर कोई असर पड़ेगा और न ही मरीजों की सुरक्षा से कोई समझौता होगा।
केंद्र ने अपने हलफनामे में बताया कि NEET PG कोई न्यूनतम योग्यता तय करने की परीक्षा नहीं है, बल्कि यह सीमित पीजी सीटों के आवंटन के लिए एक छंटाई (स्क्रीनिंग) प्रक्रिया है। किसी डॉक्टर की न्यूनतम योग्यता MBBS डिग्री से तय होती है, और सभी उम्मीदवार पहले से ही लाइसेंस प्राप्त MBBS डॉक्टर होते हैं, जिन्हें स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस करने का अधिकार है।
कटऑफ घटाने का यह फैसला 13 जनवरी 2026 को जारी नोटिफिकेशन के तहत लिया गया था। इसमें जनरल कैटेगरी के लिए कटऑफ 7 परसेंटाइल और SC, ST, OBC वर्ग के लिए 0 परसेंटाइल कर दी गई थी। इसके बाद माइनस 40 स्कोर तक पाने वाले आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार भी पीजी एडमिशन के लिए पात्र हो गए थे, जिसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।
मरीजों की सुरक्षा को लेकर उठी चिंताओं पर केंद्र सरकार ने कहा कि मेडिकल पीजी की पढ़ाई तीन साल की ट्रेनिंग प्रक्रिया होती है, जिसमें छात्र सीनियर फैकल्टी और विशेषज्ञ डॉक्टरों की लगातार निगरानी में काम करते हैं। अंतिम योग्यता का मूल्यांकन एमडी/एमएस परीक्षाओं के जरिए किया जाता है, जहां बिना किसी छूट के थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों में कम से कम 50% अंक लाना अनिवार्य है।
केंद्र ने यह भी बताया कि संभावित रूप से बड़ी संख्या में पीजी सीटें खाली रहने की आशंका को देखते हुए यह फैसला लिया गया। कटऑफ में कमी से तीसरे राउंड की काउंसलिंग में करीब 1 लाख अतिरिक्त उम्मीदवार पात्र होंगे और कुल योग्य उम्मीदवारों की संख्या बढ़कर 2.28 लाख से ज्यादा हो जाएगी।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है और यह प्रक्रिया पिछले कुछ वर्षों से चली आ रही है। फिलहाल कोर्ट ने सभी याचिकाओं को टैग करते हुए मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च को तय की है।













