29 जनवरी, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
International Desk: करीब आठ साल बाद ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर आधिकारिक दौरे पर चीन पहुंचे हैं। इससे पहले साल 2018 में तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने चीन की यात्रा की थी। लेबर पार्टी सरकार के मुखिया स्टार्मर का यह दौरा केवल औपचारिक नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे ब्रिटेन–चीन संबंधों में संभावित बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। ऐसे समय में जब ब्रिटेन आर्थिक दबाव का सामना कर रहा है और अमेरिका के साथ रिश्तों में कुछ तल्खी नजर आ रही है, चीन से नजदीकी बढ़ाना लंदन की रणनीतिक जरूरत बन गई है।
चार दिन के इस दौरे के दौरान गुरुवार को प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की सबसे अहम मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होगी। ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में दोनों नेताओं के बीच करीब 40 मिनट तक बातचीत तय है, जिसके बाद संयुक्त लंच भी होगा। इसके अलावा स्टार्मर चीन के प्रधानमंत्री ली क्यांग और संसद प्रमुख झाओ लेजी से भी मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में द्विपक्षीय रिश्तों, वैश्विक हालात और आर्थिक सहयोग पर विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है।
यह दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है जब ब्रिटेन और अमेरिका के रिश्तों में तनाव के संकेत दिखाई दे रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों, खासकर ग्रीनलैंड को लेकर दिए गए संकेतों ने कई यूरोपीय देशों को असहज किया है। इसी कारण ब्रिटेन समेत कई पश्चिमी देश चीन के साथ अपने रिश्तों को दोबारा संतुलित करने की कोशिश कर रहे हैं। स्टार्मर की यह यात्रा कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की चीन यात्रा के तुरंत बाद हो रही है, जहां व्यापारिक बाधाओं को कम करने को लेकर सहमति बनी थी।
आर्थिक मोर्चे पर दबाव झेल रही लेबर सरकार के लिए यह दौरा काफी अहम है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, स्टार्मर सरकार को अब तक वह आर्थिक रफ्तार हासिल नहीं हो पाई है, जिसका वादा चुनाव से पहले किया गया था। ऐसे में चीन जैसे बड़े बाजार से निवेश और व्यापार बढ़ाने की उम्मीद ब्रिटेन के लिए राहत का रास्ता खोल सकती है। माना जा रहा है कि इस यात्रा के दौरान कई अहम व्यापार और निवेश समझौतों की घोषणा हो सकती है, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में सुधार का संदेश जाएगा।
इसके अलावा अवैध प्रवासन के मुद्दे पर भी दोनों देश सहयोग बढ़ाने पर सहमत हो सकते हैं। खास तौर पर उन संगठित गिरोहों पर कार्रवाई को लेकर चर्चा होगी, जो यूरोप में अवैध प्रवासन के लिए चीनी इंजनों का इस्तेमाल छोटी नावों में करते हैं। हालांकि प्रधानमंत्री स्टार्मर ने साफ किया है कि वह बातचीत के दौरान मानवाधिकार जैसे संवेदनशील मुद्दों को भी उठाएंगे। इसके बावजूद, प्रतिनिधिमंडल में शामिल 50 से ज्यादा कारोबारी यह संकेत दे रहे हैं कि इस चीन दौरे का मुख्य फोकस आर्थिक लाभ और व्यापारिक अवसरों पर ही रहने वाला है।













