29 जनवरी, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
Chandigarh Desk: मेयर पद पर कब्जा जमाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने चंडीगढ़ नगर निगम में अपना दबदबा और मजबूत कर लिया है। सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर—दोनों अहम पदों पर भी बीजेपी ने जीत दर्ज की है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) के बीच गठबंधन टूटने का सीधा फायदा बीजेपी को मिला।
वार्ड नंबर-32 से बीजेपी पार्षद जसमनप्रीत सिंह चंडीगढ़ के नए सीनियर डिप्टी मेयर चुने गए। उनके मुकाबले कांग्रेस ने सचिन गालव और आम आदमी पार्टी ने मुन्नवर खान को उम्मीदवार बनाया था। वहीं वार्ड नंबर-4 से बीजेपी की सुमन देवी ने डिप्टी मेयर पद पर जीत हासिल की। इस पद के लिए कांग्रेस की निर्मला देवी और AAP की जसविंदर कौर मैदान में थीं।
कांग्रेस ने मेयर के बाद चुनाव का किया बहिष्कार
गौरतलब है कि कांग्रेस ने केवल मेयर चुनाव में ही हिस्सा लिया। मेयर चुनाव संपन्न होने के बाद सांसद मनीष तिवारी समेत कांग्रेस के सभी पार्षद नगर निगम के असेंबली हॉल से बाहर चले गए। इसके चलते सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव में कांग्रेस ने भाग नहीं लिया। नतीजतन, वोटों के आंकड़ों में बीजेपी भारी पड़ी और दोनों पद आसानी से अपने नाम कर लिए।
हाथ उठाकर हुई वोटिंग, पहली बार बदली प्रक्रिया
गुरुवार सुबह 11 बजे सबसे पहले मेयर पद के लिए वोटिंग कराई गई। चंडीगढ़ मेयर चुनाव के इतिहास में यह पहला मौका था जब हाथ उठाकर वोटिंग कराई गई। चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा नियुक्त पीठासीन अधिकारी डॉ. रमणीक सिंह बेदी की मौजूदगी में चुनाव प्रक्रिया पूरी हुई। मेयर चुने जाने के बाद सीनियर डिप्टी मेयर और फिर डिप्टी मेयर का चुनाव नवनिर्वाचित मेयर सौरभ जोशी की अध्यक्षता में संपन्न हुआ।
पहले से तय मानी जा रही थी बीजेपी की जीत
संख्या बल के लिहाज से बीजेपी पहले ही सबसे मजबूत स्थिति में थी। इस बार चुनाव त्रिकोणीय रहा, लेकिन कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के अलग-अलग चुनाव लड़ने से बीजेपी की राह और आसान हो गई। यदि दोनों दल साथ आते तो मुकाबला 18-18 की बराबरी पर पहुंच सकता था, लेकिन गठबंधन न होने से बीजेपी को सीधा फायदा मिला।
वोटों का पूरा गणित
नगर निगम सदन में कुल 36 वोट हैं—35 पार्षदों के और एक सांसद का। मेयर बनने के लिए 19 वोट जरूरी होते हैं। आम आदमी पार्टी से दो महिला पार्षदों के बीजेपी में शामिल होने के बाद बीजेपी के पार्षदों की संख्या 18 हो गई। AAP के पास अब 11, जबकि कांग्रेस के पास 6 पार्षद हैं। सांसद मनीष तिवारी के एक वोट के साथ कांग्रेस के कुल वोट 7 बनते हैं।
एक साल का होता है मेयर का कार्यकाल
चंडीगढ़ में मेयर का कार्यकाल केवल एक वर्ष का होता है और हर साल नए सिरे से चुनाव कराया जाता है। इस चुनाव में जनता सीधे मतदान नहीं करती, बल्कि जनता द्वारा चुने गए पार्षद वोट डालते हैं। कुल 35 वार्डों के पार्षद और एक सांसद इस चुनाव में हिस्सा लेते हैं।
पिछले चुनाव में भी बीजेपी ने मारी थी बाज़ी
पिछला मेयर चुनाव 30 जनवरी को हुआ था, जिसमें कम संख्या होने के बावजूद बीजेपी ने क्रॉस वोटिंग के दम पर मेयर पद जीता था। हालांकि उस समय सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद कांग्रेस-AAP गठबंधन के पास रहे थे। इस बार तस्वीर पूरी तरह बदल गई और तीनों प्रमुख पद बीजेपी के खाते में चले गए।











