बिहार चुनाव: 60% से अधिक मतदान पर हर बार बनी RJD-कांग्रेस सरकार – क्या इस बार तेजस्वी के लिए भी शुभ संकेत?

बिहार चुनाव: 60% से अधिक मतदान पर हर बार बनी RJD-कांग्रेस सरकार - क्या इस बार तेजस्वी के लिए भी शुभ संकेत?

07 नवंबर, 2025 फैक्ट रिकॉर्डर

Politics Desk: बिहार चुनाव 2025: 65% वोटिंग के साथ नया रिकॉर्ड, क्या 60% से ज्यादा मतदान फिर दिलाएगा RJD को सत्ता? बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 121 सीटों पर करीब 65% मतदान के साथ राज्य ने नया रिकॉर्ड बनाया है। यह पिछले कई दशकों के मुकाबले सबसे ज्यादा वोटिंग प्रतिशत है। इसने न केवल सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है बल्कि तेजस्वी यादव और महागठबंधन (RJD-कांग्रेस) खेमे के लिए उत्साहजनक संकेत भी दिए हैं।

चुनाव आयोग के अनुसार, इस बार पहले चरण में वोटरों ने उम्मीद से कहीं ज्यादा जोश दिखाया है। आयोग को दूसरे चरण में भी इसी रुझान के बने रहने की उम्मीद है। हालांकि, विपक्ष ने हाल ही में हुए विशेष पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग पर गड़बड़ी के आरोप लगाए थे, लेकिन इसके बावजूद वोटिंग में बड़ी भागीदारी देखने को मिली।

40 साल में चौथी बार 60% से अधिक मतदान

बिहार के पिछले 40 साल के चुनावी इतिहास को देखें तो यह चौथी बार है जब मतदान प्रतिशत 60% के पार गया है। इससे पहले 1985, 1990, 1995 और 2000 के चुनावों में ही ऐसा हुआ था। दिलचस्प बात यह है कि जिन चुनावों में 60% से अधिक मतदान हुआ, उनमें या तो कांग्रेस या फिर RJD (या उससे पहले जनता दल) की सरकार बनी।

इतिहास कहता है — अधिक वोटिंग, RJD के पक्ष में माहौल

साल 1990 में पहली बार राज्य में 62% वोटिंग हुई थी और लालू प्रसाद यादव के नेतृत्व में जनता दल की सरकार बनी।
1995 में 61.79% मतदान के साथ जनता दल ने दोबारा सत्ता पाई।
फरवरी 2000 में 62.57% वोटिंग हुई और लालू की पत्नी राबड़ी देवी मुख्यमंत्री बनीं।

इसके बाद जब 2005 में वोटिंग घटकर 46% रह गई, तो RJD सत्ता से बाहर हो गई और नीतीश कुमार का युग शुरू हुआ। तब से अब तक किसी भी विधानसभा चुनाव में मतदान 60% के पार नहीं गया था।

इस बार क्या संकेत दे रहा है रिकॉर्ड वोटिंग?

2025 के चुनाव में 65% मतदान ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या राज्य में सत्ता परिवर्तन के संकेत मिल रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ज्यादा मतदान आमतौर पर वोटरों के बदलाव की इच्छा को दर्शाता है, जो अक्सर सत्ताधारी दल के लिए चुनौती बनता है।

पहले चरण में जिन 18 जिलों में वोटिंग हुई, वहां तेजस्वी यादव, सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा जैसे कई दिग्गजों की किस्मत EVM में कैद हो चुकी है। अब दूसरे चरण में शेष 122 सीटों पर मतदान बाकी है।

क्या तेजस्वी के लिए यह शुभ संकेत है?

इतिहास के रुझानों को देखें तो 60% से अधिक वोटिंग का मतलब रहा है RJD की जीत। ऐसे में यह रिकॉर्ड मतदान तेजस्वी यादव के लिए शुभ संकेत माना जा रहा है। अगर यह ट्रेंड कायम रहा, तो संभव है कि तेजस्वी यादव का मुख्यमंत्री बनने का सपना इस बार पूरा हो जाए और नीतीश कुमार का दो दशक लंबा कार्यकाल इतिहास बन जाए।

हालांकि, अंतिम फैसला दूसरे चरण की वोटिंग और मतगणना के बाद ही तय होगा, लेकिन इतना तय है कि बिहार की राजनीति में यह चुनाव एक ऐतिहासिक मोड़ लेकर आया है।