20 फरवरी 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
Business Desk: भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर अब बड़ी कॉरपोरेट जंग शुरू हो चुकी है। यह दौड़ सिर्फ टेक कंपनियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि देश के दो सबसे बड़े उद्योगपति—Mukesh Ambani और Gautam Adani—भी इसमें हजारों करोड़ रुपये झोंकने की तैयारी में हैं। आने वाले वर्षों में एआई सेक्टर में रिकॉर्ड निवेश के साथ भारत को वैश्विक तकनीकी शक्ति बनाने की कोशिश तेज हो गई है।
दिल्ली में आयोजित एआई इंपैक्ट समिट के दौरान मुकेश अंबानी ने घोषणा की कि Reliance Industries और जियो के जरिए अगले सात वर्षों में करीब 10 लाख करोड़ रुपये एआई के क्षेत्र में निवेश किए जाएंगे। अंबानी के मुताबिक यह निवेश किसी प्रयोग के तौर पर नहीं, बल्कि भविष्य की मजबूत रणनीति के तहत किया जा रहा है। उनका कहना है कि भारत के पास दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल यूजर बेस, सस्ती डेटा दरें और तेजी से बढ़ता नेटवर्क है, जो एआई विकास के लिए मजबूत आधार बनाता है। उनका जोर इस बात पर है कि एआई का लाभ केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि गांवों और आम लोगों तक भी पहुंचे।
वहीं दूसरी ओर, Adani Group भी एआई और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े पैमाने पर निवेश की तैयारी में है। समूह 2035 तक करीब 9 लाख करोड़ रुपये खर्च कर एआई-रेडी डेटा सेंटर नेटवर्क विकसित करने की योजना बना रहा है। इस निवेश का बड़ा हिस्सा रिन्यूएबल एनर्जी से संचालित डेटा सेंटरों पर केंद्रित होगा। अडानी समूह का लक्ष्य मौजूदा 2 गीगावॉट क्षमता को बढ़ाकर 5 गीगावॉट तक ले जाना है।
इस दिशा में अडानी समूह वैश्विक टेक दिग्गजों के साथ साझेदारी भी कर रहा है। विशाखापत्तनम में बड़े एआई डेटा सेंटर कैंपस के लिए Google के साथ सहयोग किया जा रहा है, जबकि हैदराबाद और पुणे में प्रस्तावित परियोजनाओं को लेकर Microsoft से बातचीत चल रही है। गौतम अडानी का मानना है कि आने वाली औद्योगिक क्रांति एआई के इर्द-गिर्द ही घूमेगी और जो देश ऊर्जा व कंप्यूटिंग को एक साथ जोड़ पाएंगे, वही भविष्य की दिशा तय करेंगे।
आम लोगों को क्या फायदा?
इतने बड़े निवेश का असर सिर्फ कॉरपोरेट मुनाफे तक सीमित नहीं रहेगा। इससे लाखों नई नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है, स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी और डिजिटल सेवाएं पहले से ज्यादा सस्ती व बेहतर हो सकेंगी। शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य, बिजनेस और रोजमर्रा के कामकाज में एआई की भूमिका तेजी से बढ़ेगी।
कुल मिलाकर, अडानी और अंबानी की यह निवेश होड़ भारत को वैश्विक एआई मैप पर एक नई और मजबूत पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।













