VVIP उड़ानों का अड्डा, लेकिन बुनियादी सुविधाओं का अभाव: अजित पवार विमान हादसे के बाद बारामती एयरपोर्ट पर उठे गंभीर सवाल

29 जनवरी, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

National Desk:  महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की विमान दुर्घटना में मौत के बाद पुणे के पास स्थित बारामती एयरपोर्ट देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। जिस एयरपोर्ट पर VVIP नेताओं और चार्टर विमानों की लैंडिंग होती है, उसकी सुरक्षा और संचालन व्यवस्था पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) खुद इस एयरपोर्ट को “अनकंट्रोल्ड एयरोड्रोम” मानता है। यह एयरपोर्ट न तो एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के अधीन है और न ही यहां नियमित एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) सेवाएं उपलब्ध हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि इतने संवेदनशील संचालन का जिम्मा आखिर किसके भरोसे है?

ट्रेनिंग स्टूडेंट्स संभालते हैं ATC

बारामती एयरपोर्ट का इस्तेमाल मुख्य रूप से फ्लाइट ट्रेनिंग के लिए किया जाता है। यहां मौजूद रेडबर्ड फ्लाइट ट्रेनिंग एकेडमी और कार्वर एविएशन द्वारा बेसिक ATC सुविधाएं चलाई जाती हैं। DGCA के अनुसार, एयर ट्रैफिक कंट्रोल की जिम्मेदारी कई बार ट्रेनिंग ले रहे छात्र या इंस्ट्रक्टर संभालते हैं।

हादसे वाले दिन VVIP लैंडिंग के कारण ATC कार्वर एविएशन के एक फ्लाइट इंस्ट्रक्टर द्वारा मैनेज किया जा रहा था।

किसके अधीन है एयरपोर्ट?

महाराष्ट्र एयरपोर्ट्स डेवलपमेंट कंपनी (MADC) के मुताबिक, बारामती राज्य के 15 बिना लाइसेंस वाले घरेलू एयरपोर्ट्स में से एक है। यह महाराष्ट्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MIDC) के अधीन है और बारामती एयरपोर्ट लिमिटेड (BAL) द्वारा संचालित किया जाता है।

यहां 7710 फीट लंबा रनवे है, जो लियरजेट जैसे विमानों के लिए पर्याप्त माना जाता है। एयरफील्ड मैनेजर के अनुसार, हर महीने 6–7 चार्टर फ्लाइट्स यहां उतरती हैं, जिनमें अधिकतर नेताओं की होती हैं।

बेहद सीमित इंफ्रास्ट्रक्चर

एयरपोर्ट बिल्डिंग में सिर्फ दो केबिन और एक कमरा है। न तो आधुनिक नेविगेशन सिस्टम है और न ही इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS)। विशेषज्ञों का कहना है कि कम दृश्यता की स्थिति में ऐसे सिस्टम होते तो हादसे से बचा जा सकता था।

हादसे के समय विजिबिलिटी करीब तीन किलोमीटर बताई गई, जबकि सुरक्षित लैंडिंग के लिए पांच किलोमीटर जरूरी मानी जाती है। पायलट ने पहली लैंडिंग रद्द की थी और दोबारा प्रयास के दौरान विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

हादसे के बाद जागा प्रशासन

घटना के बाद भारतीय वायुसेना ने बारामती एयरपोर्ट पर एक विशेष टीम तैनात की है, जो अस्थायी रूप से ATC और मौसम संबंधी सेवाएं दे रही है। वायुसेना ने कहा कि प्रशासन के अनुरोध पर सुरक्षित हवाई संचालन सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया।

बड़ा सवाल

विशेषज्ञ मानते हैं कि रनवे की लंबाई इस हादसे का कारण नहीं थी, लेकिन आधुनिक ATC, रडार और इंस्ट्रूमेंट सिस्टम की कमी ने जोखिम जरूर बढ़ाया।
अब सवाल यह है कि जब तक कोई बड़ा हादसा न हो जाए, क्या ऐसे एयरपोर्ट्स की सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान नहीं दिया जाएगा?