2/April/2025 Fact Recorder
संसार में कई विभिन्नताएं हैं, यही हमारी सृष्टि का सौंदर्य है। यहां अनेक जातियां हैं, मत हैं, कई पंथ-संप्रदाय हैं, लेकिन हमारी संस्कृति कहती हैं कि सभी में एक ही परमात्मा समाया हुआ है। परमात्मा एक ही है और वही हमें अनेक रूपों में दिखाई देता है। परमात्मा एक से अनेक होकर दिखाई देता है। अनेक ईश्वर नहीं हैं, ईश्वर एक ही है।
आज जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र में जानिए हमारी संस्कृति का संदेश क्या है?
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