01 जनवरी, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
International Desk: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष और लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भारत-पाकिस्तान के बीच कथित मध्यस्थता को लेकर चीन के दावे पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे भारत की संप्रभुता पर चोट बताते हुए केंद्र सरकार से इसका सख्त खंडन करने की मांग की है।
संप्रभुता की कीमत पर नहीं हो सकते संबंध
ओवैसी ने कहा कि चीन के साथ संबंधों में सामान्य स्थिति भारत के सम्मान और उसकी संप्रभुता की कीमत पर नहीं हो सकती। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाने की अपील की।
अमेरिका के बाद अब चीन का दावा
ओवैसी ने कहा,
“पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान के बीच युद्धविराम कराने और व्यापार प्रतिबंधों के जरिए शांति स्थापित करने के बेबुनियाद दावे किए थे। अब चीनी विदेश मंत्री भी इसी तरह का दावा कर रहे हैं। यह भारत का अपमान है और सरकार को इसे तुरंत खारिज करना चाहिए।”
मोदी सरकार से सवाल
AIMIM सांसद ने सवाल उठाते हुए कहा,
“क्या प्रधानमंत्री की चीन यात्रा के दौरान मोदी सरकार ने ऐसी किसी मध्यस्थता पर सहमति जताई थी?”
उन्होंने कहा कि चीनी विदेश मंत्री का यह बयान हैरान करने वाला है और सरकार को आधिकारिक तौर पर इसका खंडन करते हुए देश को यह भरोसा दिलाना चाहिए कि भारत किसी भी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करता।
चीन ने क्या कहा था?
गौरतलब है कि चीन दक्षिण एशिया में अपनी भूमिका को प्रभावशाली दिखाने की कोशिश कर रहा है। इसी क्रम में चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने दावा किया था कि भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव उन “महत्वपूर्ण मुद्दों” में शामिल था, जिन पर चीन ने वर्ष 2025 में मध्यस्थता की।
भारत का स्पष्ट रुख
हालांकि, पहलगाम आतंकी हमले के बाद 7 से 10 मई के बीच हुए भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव को लेकर भारत ने शुरू से ही स्पष्ट किया है कि समाधान दोनों देशों के डीजीएमओ के बीच सीधी बातचीत से निकला था और इसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं थी।













