28 नवंबर, 2025 फैक्ट रिकॉर्डर
Health Desk: सर्दियों के शुरू होते ही वायरल निमोनिया के मामले तेजी से बढ़ने लगते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ठंड के मौसम में शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ जाती है, जिससे वायरस आसानी से फेफड़ों को संक्रमित कर सकते हैं। लेडी हार्डिंग अस्पताल के डॉ. एल.एच. घोटेकर बताते हैं कि वायरल निमोनिया को हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि यह फेफड़ों में सूजन पैदा कर सांस लेना मुश्किल कर देता है।
क्यों बढ़ता है वायरल निमोनिया का खतरा?
ठंड में इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है, वायरस तेजी से सक्रिय हो जाते हैं।
हवा अधिक सूखी होने से नाक और गले की म्यूकस लेयर सूख जाती है, जिससे वायरस शरीर में आसानी से प्रवेश करता है।
लोग ज्यादातर समय कमरों में बंद रहते हैं, जिससे संक्रमण तेजी से फैलता है।
फ्लू, आरएसवी और अन्य श्वसन वायरस इस मौसम में सबसे ज्यादा फैलते हैं।
वायरल निमोनिया के लक्षण
बुखार, सूखी खांसी, छींक, ठंड लगना
सांस फूलना, सीने में दर्द या जकड़न
थकान, शरीर में दर्द, भूख कम लगना
तेज सांसें चलना (खासकर बच्चों व बुजुर्गों में)
बच्चों, बुजुर्गों, अस्थमा, हार्ट डिजीज और डायबिटीज मरीजों में इसका खतरा अधिक होता है।
कैसे करें बचाव?
गर्म कपड़े पहनें और ठंड से खुद को बचाएं।
हाथों की नियमित सफाई करें और भीड़भाड़ में मास्क पहनें।
कमरे में ताजी हवा आने दें।
पानी और तरल पदार्थ ज्यादा लें।
फ्लू वैक्सीन जरूर लगवाएं।
किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें, तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
इम्यूनिटी बढ़ाने वाले भोजन जैसे सूखे मेवे, गाजर, सूप आदि लें।
डॉ. घोटेकर का कहना है—
“समय पर पहचान और इलाज से वायरल निमोनिया की गंभीरता को काफी हद तक रोका जा सकता है।”













