21 अगस्त 2025 फैक्ट रिकॉर्डर
Business Desk: भारतीय सरकारी तेल कंपनियों ने रूसी कच्चे तेल पर छूट बढ़ने के बाद आयात दोबारा शुरू कर दिया है। भारत पेट्रोलियम (BPCL) और इंडियन ऑयल (IOC) ने सितंबर और अक्तूबर डिलीवरी के लिए खरीद के नए सौदे किए हैं। इससे पहले जुलाई में छूट घटने और अमेरिकी दबाव के चलते रिफाइनरियों ने रूसी तेल की खरीद रोक दी थी।
🔹 क्यों बदली रणनीति? अधिकारियों के मुताबिक, रूस के यूराल्स क्रूड पर छूट बढ़कर करीब 3 डॉलर प्रति बैरल हो गई है, जिससे यह फिर से आकर्षक हो गया है। इंडियन ऑयल ने यूराल्स के अलावा वरंडे और साइबेरियन लाइट जैसे रूसी ग्रेड भी खरीदे हैं।
🔹 चीन पर असर भारत द्वारा खरीद रोकने के दौरान चीन ने रूसी तेल की खरीद में इजाफा कर लिया था। अब जब भारतीय रिफाइनरियों ने सौदे फिर शुरू किए हैं, तो चीन के लिए आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है।
🔹 जुलाई में सबसे बड़ी गिरावट आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2025 में भारत का रूसी तेल आयात घटकर 15 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया, जो जून की तुलना में 24.5% कम है। इस दौरान भारत का कुल कच्चा तेल आयात 44.4 लाख बैरल प्रतिदिन रहा, जिसमें रूस की हिस्सेदारी लगभग 34% रही। यह सितंबर 2023 के बाद से सबसे कम आयात स्तर है।
🔹 लैटिन अमेरिका से आयात बंद जुलाई में भारत ने 2011 के बाद पहली बार लैटिन अमेरिका से तेल का आयात पूरी तरह रोक दिया। वहीं ओपेक देशों का भारत के कुल आयात में हिस्सा पांच माह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।
🔹 इराक और सऊदी अरब की स्थिति रूस अब भी भारत का सबसे बड़ा सप्लायर बना हुआ है, जबकि इराक और सऊदी अरब दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने जुलाई में अपनी रूसी तेल की खरीद जून की तुलना में लगभग 19% कम कर दी थी। इसके बाद सरकारी कंपनियों ने विकल्प के तौर पर मध्य पूर्व और अमेरिका से आपूर्ति बढ़ा दी।
🔹 आगे की स्थिति इंडियन ऑयल ने साफ किया है कि वह बाजार की आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार रूसी तेल खरीदना जारी रखेगी। उधर, चीनी कंपनियां पहले ही अक्तूबर और नवंबर डिलीवरी के लिए 15 रूसी कार्गो बुक कर चुकी हैं।