20 मार्च 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
Business Desk: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत में संभावित एलपीजी और तेल संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा-3 लागू कर दी है। इस कदम का उद्देश्य देश में पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति बनाए रखना और जमाखोरी तथा कालाबाजारी पर रोक लगाना है।
सरकार द्वारा जारी राजपत्र अधिसूचना के अनुसार अब पेट्रोलियम उत्पादों और प्राकृतिक गैस से जुड़े उत्पादन, प्रसंस्करण, शोधन, भंडारण, आयात-निर्यात, विपणन और उपभोग से संबंधित सभी कंपनियों को अपना ताजा डेटा पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (PPAC) के साथ साझा करना अनिवार्य होगा। यह प्रकोष्ठ तेल मंत्रालय के लिए ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी सूचनाओं को एकत्रित करने और उनका विश्लेषण करने का काम करता है।
पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के मुताबिक, इस व्यवस्था से सरकार को आपात स्थिति में ऊर्जा आपूर्ति की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी। धारा-3 के तहत जारी आदेशों का उल्लंघन करने पर इसे अपराध माना जाएगा और दोषी पाए जाने पर जेल की सजा भी हो सकती है।
क्या है आवश्यक वस्तु अधिनियम?
आवश्यक वस्तु अधिनियम सरकार को यह अधिकार देता है कि वह नागरिकों को जरूरी वस्तुएं उचित कीमतों पर उपलब्ध कराए और जमाखोरी, कालाबाजारी तथा कृत्रिम कमी जैसी स्थितियों को रोके। इस कानून के तहत सरकार उत्पादन, आपूर्ति और वितरण को नियंत्रित कर सकती है, स्टॉक सीमा तय कर सकती है और जरूरत पड़ने पर कीमतों को भी विनियमित कर सकती है।
कई देशों से होता है तेल-गैस का आयात
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। देश रूस, अमेरिका, वेनेजुएला समेत करीब 40 देशों से कच्चा तेल आयात करता है, जबकि प्राकृतिक गैस की आपूर्ति अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, नॉर्वे और रूस जैसे देशों से होती है। ऐसे में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को देखते हुए सरकार ऊर्जा आपूर्ति पर विशेष निगरानी रख रही है।













