21 फरवरी 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
National Desk: इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने पुलिस द्वारा दर्ज की जा रही एफआईआर में एक जैसे “फिल्मी पैटर्न” अपनाने पर सख्त नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि कई FIR ज़मीनी हकीकत को नहीं दर्शातीं और उनमें फिल्मों के डायलॉग तक शामिल किए जा रहे हैं, जो गंभीर आपराधिक मामलों में अस्वीकार्य है।
कोर्ट ने बहराइच जिले में दर्ज एक FIR का हवाला दिया, जिसमें पुलिस एनकाउंटर के बाद गोहत्या से जुड़े आरोपियों की गिरफ्तारी दिखाई गई थी। FIR में “तुम लोग पुलिस से घिर चुके हो” जैसे डायलॉग और एनकाउंटर के दौरान हुई कथित बातचीत का उल्लेख है। कोर्ट ने गंभीर विसंगति की ओर इशारा करते हुए कहा कि FIR में एनकाउंटर का समय सुबह 10:45 बजे दर्ज है, जबकि उसमें आरोपी के “उजाला होने वाला है” कहने का जिक्र किया गया—जो समय से मेल नहीं खाता।
जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने 16 फरवरी के आदेश में कहा कि अब समय आ गया है कि अदालत हस्तक्षेप करे और अधिकारियों द्वारा दर्ज की जा रही मनगढ़ंत व बढ़ा-चढ़ाकर लिखी गई FIR पर रोक लगाए। पीठ ने स्पष्ट किया कि ऐसे विवरण कानून के दुरुपयोग की ओर इशारा करते हैं।
कोर्ट ने बहराइच के पुलिस अधीक्षक को दो सप्ताह के भीतर व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। ऐसा न करने पर उन्हें अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा। यह आदेश बहराइच मामले में गिरफ्तार तीन आरोपियों में से एक अकबर अली की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया।
कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि FIR में दर्ज घटनाक्रम—पुलिस की चेतावनी, आरोपियों की कथित प्रतिक्रिया और फायरिंग—तथ्यों के स्तर पर अविश्वसनीय प्रतीत होते हैं। इन खामियों के मद्देनज़र अदालत ने पुलिस से स्पष्ट जवाब मांगा है, ताकि FIR की सत्यता और प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।













