नेपाल में नई सरकार के बाद सीमा पर बढ़ी हलचल, भारत-नेपाल ने शुरू किया संयुक्त बॉर्डर सर्वे

30 मार्च 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

National Desk:  नेपाल में नई सरकार के गठन के बाद भारत-नेपाल सीमा पर गतिविधियां तेज हो गई हैं। प्रधानमंत्री बने बालेन शाह (बालेंद्र शाह) के पदभार संभालने के बाद दोनों देशों ने संयुक्त सीमा सर्वेक्षण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती में भारत-नेपाल जॉइंट बॉर्डर सर्वे टीम-3 की पहली अंतरराष्ट्रीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

बैठक में भारत की ओर से श्रावस्ती, बलरामपुर, बहराइच, सिद्धार्थनगर और महाराजगंज के जिलाधिकारी समेत कई प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे, जबकि नेपाल की ओर से बर्दिया, बांके, रूपनदेही, दांग, कपिलवस्तु और नवलपरासी जिलों के अधिकारी शामिल हुए। इसके अलावा सशस्त्र सीमा बल (SSB) और नेपाल पुलिस के अधिकारी भी बैठक में मौजूद थे।

इस संयुक्त सर्वे का मुख्य उद्देश्य सीमा से सटे क्षेत्रों, खासकर ‘नो मैंस लैंड’ में अतिक्रमण हटाना और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना है। दोनों देशों ने सीमा से जुड़े सात जिलों में सर्वे का काम शुरू कर दिया है, जिसमें बिहार के पूर्वी और पश्चिमी चंपारण भी शामिल हैं।

अधिकारियों के मुताबिक, इस सर्वे के दौरान सीमा स्तंभों की जांच, मरम्मत और नए स्तंभों की स्थापना की जाएगी। जहां-जहां सीमा चिन्ह गायब हैं, उन्हें दोबारा स्थापित किया जाएगा। साथ ही सीमा क्षेत्र में अवैध निर्माण और कब्जों को हटाने की कार्रवाई भी जारी है।

रक्सौल और आसपास के इलाकों में हाल ही में दोनों देशों की एजेंसियों ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की है। अधिकारियों का कहना है कि सीमा की सुरक्षा और स्पष्टता बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी है।

बताया जा रहा है कि यह संयुक्त सर्वे एक महीने के भीतर पूरा कर लिया जाएगा, जबकि फील्ड सर्वे टीम (FST) 15 दिनों के अंदर अपनी अंतरिम रिपोर्ट गृह मंत्रालय को सौंपेगी। इस पहल से भारत-नेपाल के बीच सीमा प्रबंधन और समन्वय को और मजबूत करने की उम्मीद है।