फाजिल्का, 13 नवंबर, 2025 फैक्ट रिकॉर्डर
Punjab Desk: ब्लॉक फाजिल्का के गांव मुंबेका के प्रगतिशील किसान बलविंदर सिंह और तरसेम सिंह बाठ धान की पराली को जलाने के बजाय विभिन्न कृषि उपकरणों की मदद से खेत में मिलाकर गेहूं की बुआई कर रहे हैं। किसान बलविंदर सिंह ने बताया कि वे लगभग 50 एकड़ जमीन पर खेती करते हैं और इस बार धान की कटाई एस.एम.एस. वाली कम्बाइन से करवाने के बाद गेहूं की बुआई हैप्पी सीडर से की है। इस तरीके से ये किसान लगातार पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाने का प्रयास कर रहे हैं और अन्य किसानों को भी प्रेरित कर रहे हैं।
किसान बलविंदर सिंह ने बताया कि वे पिछले आठ सालों से फसल के अवशेष नहीं जलाते। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से उनकी जमीन की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और अगली फसल की पैदावार भी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि वे लगातार कृषि विभाग के संपर्क में रहते हैं और विभाग की हिदायतों का पालन करते हुए आधुनिक कृषि उपकरणों की मदद से फसल की बुआई करते हैं जिससे उन्हें अच्छी उपज मिलती है। उन्होंने जिले के अन्य किसानों से भी अपील की कि वे फसल अवशेष को जलाने की बजाय आधुनिक कृषि यंत्रों की मदद से उसे जमीन में मिला कर अगली फसल बोएं।
इस मौके पर कृषि विभाग के बी.टी.एम. राजदविंदर सिंह और सर्कल इंचार्ज सुखदीप सिंह ने बताया कि वे लगातार किसानों को फसल के अवशेष न जलाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। किसान बलविंदर सिंह बाठ जैसे किसान इस दिशा में उदाहरण बने हुए हैं और अब कई अन्य किसान भी अपनी पराली को नहीं जला रहे। अधिकारियों ने कहा कि आज उन्होंने इस प्रगतिशील किसान के खेत का दौरा किया तो बहुत खुशी हुई कि किसान बलविंदर सिंह पर्यावरण के रक्षक बनकर बिना पराली जलाए गेहूं की बुआई कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पराली जलाने से वातावरण प्रदूषित होता है और इससे मानव स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है। इसलिए हमें पराली नहीं जलानी चाहिए। सरकार की ओर से पराली प्रबंधन के लिए विभिन्न मशीनें सब्सिडी पर उपलब्ध करवाई गई हैं, जिनका उपयोग कर पराली का सही प्रबंधन किया जा सकता है।













