रहमान डकैत से भी ज्यादा दमदार वापसी, 17 साल बाद देश लौटे तारिक रहमान और सीधे पीएम की कुर्सी तक

13 फरवरी 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

International Desk: अगर आपने इंडियन फिल्म धुरंधर देखी है, तो उसमें रहमान डकैत की एंट्री आपको जरूर याद होगी। ठीक वैसी ही धमाकेदार एंट्री इन दिनों बांग्लादेश की राजनीति में देखने को मिल रही है, जहां 17–18 साल के लंबे निर्वासन के बाद तारिक रहमान की वापसी ने सियासी माहौल बदल दिया है।

चुनाव से ठीक पहले बांग्लादेश लौटे तारिक रहमान को तभी से बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) का प्रधानमंत्री पद का चेहरा माना जा रहा था। उनके नेतृत्व में पार्टी ने पहली बार चुनाव लड़ा और शानदार जीत दर्ज की। अब समर्थकों और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच यह लगभग तय माना जा रहा है कि तारिक रहमान ही बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री होंगे।

पहली बार संभाली कमान, पहली ही जीत
साल 2026 के आम चुनावों में BNP का नेतृत्व पहली बार तारिक रहमान ने किया। पार्टी की रणनीति, चुनावी रूपरेखा और उम्मीदवारों का चयन—सब कुछ उन्हीं के निर्देशन में हुआ। यही नहीं, तारिक ने खुद भी पहली बार चुनाव लड़ा और दो सीटों से मैदान में उतरकर दोनों पर जीत हासिल की।

चुनाव से पहले खालिदा ज़िया का निधन
BNP की यह जीत ऐसे समय में आई जब शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग चुनावी प्रक्रिया से बाहर रही। चुनाव से कुछ महीने पहले ही पार्टी प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा ज़िया का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था। इसके बाद पार्टी की पूरी जिम्मेदारी बेटे तारिक रहमान के कंधों पर आ गई।

भ्रष्टाचार के आरोप और देश छोड़ने की कहानी
तारिक रहमान पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे, जिसके चलते उन्हें 2007 में जेल जाना पड़ा। करीब 18 महीने जेल में बिताने के बाद 2008 में इलाज के लिए सरकार की अनुमति से वे लंदन चले गए। इसके बाद वे दोबारा बांग्लादेश नहीं लौटे और करीब 18 साल तक लंदन में ही रहे।

17–18 साल बाद वापसी और सियासी धमाका
करीब 18 साल बाद 25 दिसंबर को तारिक रहमान की बांग्लादेश वापसी हुई। लौटने के कुछ ही दिनों बाद उनकी मां खालिदा ज़िया का निधन हो गया, जिसके बाद पार्टी की कमान पूरी तरह उनके हाथ में आ गई। लंदन में रहते हुए भी वे लगातार शेख हसीना सरकार पर हमलावर रहे और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच उनका कद बना रहा।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लंबे निर्वासन के बावजूद पार्टी कार्यकर्ता तारिक रहमान को ही अपना असली नेता मानते रहे। यही वजह है कि उनकी वापसी के साथ ही BNP को नई ऊर्जा मिली और अब बांग्लादेश की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।