01 दिसंबर, 2025 फैक्ट रिकॉर्डर
National Desk: एक 32 वर्षीय व्यक्ति को आखिरकार 14 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अपना असली हिंदू नाम वापस मिल गया। बॉम्बे हाई कोर्ट ने उसके स्कूल, कॉलेज और बोर्ड के सभी रिकॉर्ड में उसका नाम ग्रेगरी थॉमस से बदलकर मिलिंद विनोद सेठ करने की अनुमति दे दी।
जस्टिस रवींद्र घुगे और अश्विन भोबे की बेंच के सामने यह याचिका 14 साल से लंबित थी। युवक का जन्म प्रमाणपत्र 1993 में हिंदू नाम के साथ जारी हुआ था, लेकिन स्कूल लीविंग, SSC और HSC सर्टिफिकेट में उसका ईसाई नाम दर्ज था—जबकि धर्म ‘हिंदू’ लिखा था। यह स्थिति उसके माता-पिता की इंटर-फेथ मैरिज और पिता के अस्थायी धर्म परिवर्तन के कारण पैदा हुई थी।
सालों तक पहचान को लेकर भटका युवक
मिलिंद ने 2011 में एफिडेविट के जरिए नाम बदलने की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन शिक्षा विभाग से राहत न मिलने पर वे हाई कोर्ट पहुंचे। कोर्ट ने इसे “अनोखा मामला” बताया, जहां पिटीशनर को एक पैरेलल आइडेंटिटी के साथ जिंदगी गुजारनी पड़ी।
2019 के एक फैसले में स्कूल छोड़ने के बाद नाम बदलने की अनुमति सीमित बताई गई थी, लेकिन कोर्ट ने माना कि यह मामला एक “साफ गलती” से आगे बढ़कर पहचान संकट का है। इसलिए बिना कोई मिसाल बनाए, इस मामले में बदलाव को आवश्यक माना गया।
कोर्ट ने संबंधित स्कूल, कॉलेज, SSC और HSC बोर्ड को 30 दिन के भीतर नया नाम दर्ज कर नए डॉक्यूमेंट जारी करने का निर्देश दिया।












