Sirsa-Risalia-Khera-village-panchayat-land-lease-dispute-escalates-update | सिरसा में पंचायत भूमि के ठेके में घोटाला: काश्तकार से लिए 4.51 लाख, 2.51 लाख की दी रसीद, एसडीएम करेंगे जांच – dabwali News

गांव रिसालिया खेड़ा में पंचायत भूमि ठेके को लेकर विवाद की जानकारी देता शिकायतकर्ता।

सिरसा जिले के गांव रिसालिया खेड़ा में पंचायत भूमि ठेके को लेकर विवाद गहरा गया है। ग्राम सरपंच रेखा, उनके ससुर पाला राम (‌सरपंच प्रतिनिधि) और ग्राम सचिव पर मिलीभगत कर ठेके में गड़बड़ी करने के गंभीर आरोप लगे हैं।पीड़ित ग्रामीण रामप्रताप का आरोप है कि उ

न तो बोली रजिस्टर की प्रति दी और न ही भुगतान की रसीद। जब उसने बार-बार रसीद की मांग की, तो उसे गांव से बाहर निकालने और जान से मारने की धमकी दी गई।

ठेके की रकम में गड़बड़ी का आरोप

रामप्रताप ने बताया कि उन्होंने 102 कनाल भूमि के लिए ठेके की रकम 4 लाख 51 हजार रुपए अदा की थी, लेकिन जब उन्होंने फसल को ऑनलाइन करवाने के लिए रसीद मांगी, तो सरपंच ने रसीद देने से इनकार कर दिया। इस पर उन्होंने सीएम विंडो पर शिकायत दर्ज करवाई, जिसके बाद उन्हें रसीद दी गई। रसीद मिलने के बाद जब उन्होंने उसकी जांच की, तो उसमें गड़बड़ी पाई गई।

रसीद में 102 कनाल भूमि के ठेके की रकम मात्र 2 लाख 51 हजार रुपए दर्ज थी। रामप्रताप ने सवाल उठाया कि जब उन्होंने बोली के समय अधिक रकम अदा की थी, तो रिकॉर्ड में ठेके की रकम कम कैसे हो गई।

माैके पर मौजूद ग्रामीण।

माैके पर मौजूद ग्रामीण।

SDM को दी शिकायत

रामप्रताप ने पूरे मामले की शिकायत SDM डबवाली को दर्ज करवाई है। उन्होंने मांग की है कि पंचायत रिकॉर्ड की जांच की जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके। मामले में SDM डबवाली अर्पित संगल से फोन पर बात करनी चाही तो कोई जवाब नहीं मिला। फिलहाल प्रशासन की ओर से विस्तृत जांच का इंतजार है। पीड़ित ग्रामीण और सरपंच प्रतिनिधि के बयान एक-दूसरे के विरोधाभासी हैं, जिससे मामला और उलझ गया है।

अब यह देखना होगा कि जांच में क्या सच सामने आता है और प्रशासन क्या कदम उठाता है।

सरकारी मानकों के हिसाब से दर्ज की बोली

वहीं सरपंच प्रतिनिधि पाला राम ने आरोपों को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि ठेके की बोली सरकारी मानकों के हिसाब से दर्ज की गई थी और पूरा रिकॉर्ड एसडीएम को भी दिखाया गया था। वह जांच के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हालांकि पाला राम ने माना कि उन्होंने ही रामप्रताप को ठेका लेने के लिए कहा था और ठेके की रकम भी खुद दी थी। उनका दावा है कि रामप्रताप ने ठेके के लिए कोई पैसा नहीं दिया।

ऐसे में सवाल उठता है कि अगर रामप्रताप ने ठेके की रकम अदा ही नहीं की, तो फिर उसके नाम पर रसीद कैसे काटी गई।