September 25, 2026 Fact Recorder
International Desk: अमेरिका और चीन के बीच व्यापार एवं तकनीक को लेकर जारी मतभेदों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की व्हाइट हाउस में मुलाकात हुई। करीब 90 मिनट चली बातचीत में ताइवान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), व्यापार और वैश्विक मुद्दे प्रमुख चर्चा के केंद्र में रहे।
चीनी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, शी जिनपिंग ने अमेरिका से ताइवान की ‘आजादी’ का विरोध करने और ताइवान से जुड़े मुद्दे को सावधानी से संभालने की अपील की। वहीं, एआई के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा के साथ सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
ताइवान को लेकर शी जिनपिंग ने ट्रंप से क्या कहा?
शी जिनपिंग ने कहा कि चीन की राष्ट्रीय एकता और क्षेत्रीय अखंडता को लेकर उसका रुख स्पष्ट है। उन्होंने अमेरिका से ताइवान की ‘आजादी’ का विरोध करने और ताइवान के सवाल को सावधानी से संभालने का आग्रह किया।
चीन ताइवान को अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है और राष्ट्रीय एकीकरण की बात करता है। दूसरी ओर, ताइवान एक स्वशासित लोकतांत्रिक व्यवस्था के रूप में संचालित होता है। इसी वजह से ताइवान लंबे समय से अमेरिका-चीन संबंधों का एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है।
एआई पर सहयोग की क्यों हुई चर्चा?
शी जिनपिंग ने कहा कि अमेरिका और चीन दोनों के पास आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में मजबूत क्षमताएं हैं। उनके मुताबिक, दोनों देशों को केवल एक-दूसरे से बचने के बजाय अपनी-अपनी क्षमताओं का इस्तेमाल सहयोग के लिए भी करना चाहिए।
उन्होंने एआई से जुड़े संभावित जोखिमों और फायदों पर लगातार संवाद बनाए रखने तथा इसके गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए मिलकर काम करने की बात कही। शी ने यह भी जोर दिया कि एआई के विकास पर इंसानों का नियंत्रण बना रहना चाहिए और तकनीक का इस्तेमाल लोगों के हित में किया जाना चाहिए।
व्यापार और एआई पर ट्रंप का रुख
ट्रंप ने शी जिनपिंग की यात्रा को सकारात्मक बताया और दोनों देशों के बीच आर्थिक एवं व्यापारिक बातचीत जारी रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों को संवाद के जरिए बेहतर व्यापार समझौते की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
एआई के मुद्दे पर भी दोनों देशों के बीच बातचीत और सहयोग जारी रखने की बात सामने आई। ट्रंप ने एआई को मानवता के भविष्य से जुड़ी महत्वपूर्ण तकनीक बताया।
अमेरिका-चीन रिश्तों में स्थिरता पर जोर
शी जिनपिंग ने अमेरिका और चीन के बीच रचनात्मक तथा रणनीतिक रूप से स्थिर संबंध बनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने सहयोग को रिश्तों का आधार बनाने, प्रतिस्पर्धा को उचित सीमा में रखने और मतभेदों को प्रभावी तरीके से संभालने की बात कही।
शी के मुताबिक, समानता, पारस्परिक सम्मान और आपसी लाभ की भावना के आधार पर दोनों देश अपने मतभेदों को सुलझाने के रास्ते तलाश सकते हैं।
यूक्रेन, मध्य पूर्व और कोरियाई प्रायद्वीप पर भी चर्चा
ट्रंप और शी जिनपिंग ने ताइवान और एआई के अलावा मध्य पूर्व की स्थिति, यूक्रेन संकट और कोरियाई प्रायद्वीप से जुड़े घटनाक्रम पर भी विचार साझा किए।
दोनों नेताओं ने 2026 में होने वाली एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) की आर्थिक नेताओं की बैठक और जी20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी के दौरान एक-दूसरे का समर्थन करने पर भी सहमति जताई।
ट्रंप के साथ नेशनल आर्काइव्स पहुंचे शी जिनपिंग
शी जिनपिंग अपने तीन दिवसीय अमेरिकी दौरे के अंतिम कार्यक्रम के तहत ट्रंप के साथ वॉशिंगटन स्थित नेशनल आर्काइव्स भी पहुंचे। यहां अमेरिका की स्वतंत्रता की घोषणा, संविधान और बिल ऑफ राइट्स जैसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज सुरक्षित हैं।
ट्रंप ने कहा कि वह शी को अमेरिका के इतिहास से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज और धरोहर दिखाना चाहते हैं। यह यात्रा ऐसे समय हुई है जब अमेरिका अपनी स्थापना की 250वीं वर्षगांठ मना रहा है।
नेशनल आर्काइव्स में ‘द अमेरिकन स्टोरी’ नाम से विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई है, जिसमें अमेरिका के इतिहास और उसकी उपलब्धियों के साथ-साथ उसके कठिन दौर को भी प्रदर्शित किया गया है।
क्या संकेत देती है ट्रंप-शी की बातचीत?
ट्रंप और शी जिनपिंग की बातचीत में एक ओर ताइवान जैसे संवेदनशील मुद्दे पर चीन की मांग सामने आई, तो दूसरी ओर एआई और व्यापार जैसे क्षेत्रों में संवाद एवं सहयोग जारी रखने पर जोर दिया गया।
इससे यह स्पष्ट है कि अमेरिका और चीन के बीच रणनीतिक एवं आर्थिक मतभेदों के बावजूद उच्चस्तरीय संवाद जारी है। ताइवान, एआई और व्यापार आने वाले समय में दोनों देशों के संबंधों के प्रमुख मुद्दे बने रहेंगे।













