September 18,2026 Fact Recorder
Chandigarh Desk: चंडीगढ़ की विशेष एनडीपीएस अदालत ने करीब आठ वर्ष पुराने 16.5 किलो चरस बरामदगी मामले में फैसला सुनाते हुए दो दोषियों जोगिंदर सिंह और अनिल कुमार को 12-12 वर्ष की सजा सुनाई है। वहीं, तीसरे आरोपी राजकुमार की सजा उसके द्वारा पहले ही भुगती जा चुकी अवधि तक सीमित कर दी गई। मामले में आरोपी महिला कांता को अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
2018 में कार से बरामद हुई थी 16.5 किलो चरस
मामला एनसीबी अपराध संख्या 49/2018 से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार, 18 दिसंबर 2018 को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) को सूचना मिली थी कि सफेद रंग की वर्ना कार नंबर HP-49-A-1008 में बड़ी मात्रा में चरस ले जाई जा रही है।
सूचना के आधार पर एनसीबी टीम ने खुड्डा लाहौरा पुल के पास कार को रोककर चालक जोगिंदर सिंह और उसके साथ बैठे अनिल कुमार को हिरासत में लिया। तलाशी के दौरान कार की पिछली सीट के नीचे बने एक गुप्त खाने से 34 पैकेट बरामद किए गए। जांच के बाद इन पैकेटों को 12 लॉट में वर्गीकृत किया गया, जिनका कुल वजन 16.500 किलो पाया गया।
अदालत ने वैज्ञानिक जांच और चेन ऑफ कस्टडी के साक्ष्य माने
अदालत ने जोगिंदर सिंह और अनिल कुमार के खिलाफ बरामदगी, वैज्ञानिक जांच और चेन ऑफ कस्टडी से जुड़े अभियोजन साक्ष्यों को स्वीकार किया। अदालत के अनुसार, दोनों के खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम की धारा 20(बी)(ii)(सी), 8 और 25 के आवश्यक तत्व साबित हुए।
इसके आधार पर दोनों को 12-12 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई।
राजकुमार के घर से भी मिली थी चरस
एनसीबी ने राजकुमार को कथित तौर पर खेप का मुख्य सप्लायर बताते हुए उसके खिलाफ साजिश और मादक पदार्थों की तस्करी समेत कई आरोप लगाए थे। उसके घर की तलाशी के दौरान 80 ग्राम चरस, 35 खाली पॉलीथिन पाउच और एक इलेक्ट्रॉनिक वजन मशीन बरामद होने की बात सामने आई थी।
अदालत ने 80 ग्राम चरस की बरामदगी को साबित मानते हुए राजकुमार को एनडीपीएस अधिनियम की धारा 20(बी)(ii)(ए) के तहत दोषी ठहराया। हालांकि, 16.5 किलो की खेप का मुख्य सप्लायर होने के साथ-साथ धारा 25, 27ए और 29 के तहत लगाए गए आरोपों से उसे बरी कर दिया गया। उसकी सजा पहले से भुगती गई अवधि तक मानी गई।
कॉल डिटेल के आधार पर साजिश साबित नहीं हुई
महिला आरोपी कांता के मामले में अदालत ने पाया कि उसके कब्जे से कोई मादक पदार्थ बरामद नहीं हुआ था। अदालत ने माना कि केवल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के आधार पर उसके खिलाफ आपराधिक साजिश का आरोप साबित नहीं होता।
इसी आधार पर अदालत ने कांता को संदेह का लाभ देते हुए मामले के सभी आरोपों से बरी कर दिया।











