नई दिल्ली, 24 जून 2026 Fact Recorder
Health Desk: बढ़ते कोलेस्ट्रॉल और हृदय रोगों की चुनौती के बीच भारतीय वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। IIT बॉम्बे, IISER पुणे और IISER कोलकाता के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी नई तकनीक विकसित की है, जो शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को कम करने में सहायक साबित हो सकती है।
शोधकर्ताओं ने KTDP नामक एक विशेष पेप्टाइड विकसित किया है, जो लिवर में बनने वाले फैट को रक्त प्रवाह में पहुंचने से रोकने का काम करता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में हृदय संबंधी बीमारियों के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
अध्ययन के दौरान इस तकनीक का परीक्षण प्रयोगशाला में तैयार किए गए लिवर सेल्स और ज़ेब्राफिश पर किया गया। परिणामों में पाया गया कि KTDP की मदद से रक्त में पहुंचने वाले खराब फैट और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर में लगभग 50 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई। साथ ही शरीर में जमा होने वाला फैट ऊर्जा के रूप में उपयोग होने लगा।
विशेषज्ञों के अनुसार यह तकनीक मौजूदा कोलेस्ट्रॉल की दवाओं से अलग तरीके से काम करती है। जहां वर्तमान दवाएं शरीर में कोलेस्ट्रॉल बनने की प्रक्रिया को नियंत्रित करती हैं या रक्त से खराब कोलेस्ट्रॉल को हटाने में मदद करती हैं, वहीं KTDP फैट को शुरुआती चरण में ही रक्त तक पहुंचने से रोकने का प्रयास करता है।
हालांकि वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि यह शोध अभी प्रारंभिक चरण में है और इंसानों पर इसके परीक्षण होने बाकी हैं। किसी भी नई चिकित्सा तकनीक को आम मरीजों तक पहुंचने से पहले सुरक्षा और प्रभावशीलता के कई चरणों से गुजरना पड़ता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और स्वस्थ जीवनशैली आज भी सबसे प्रभावी उपाय हैं। यदि किसी व्यक्ति का कोलेस्ट्रॉल स्तर अधिक है, तो उसे चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार और दवाओं का सेवन करना चाहिए।
वैज्ञानिकों का मानना है कि आगे के शोध और क्लिनिकल परीक्षण सफल रहने पर यह नई तकनीक भविष्य में हृदय रोगों की रोकथाम और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण विकल्प बन सकती है।













