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कच्चा तेल सस्ता, शेयर बाजार मजबूत और FIIs की खरीदारी जारी, फिर भी रुपये पर क्यों बढ़ रहा दबाव?

नई दिल्ली, 24 जून 2026 Fact Recorder

Business Desk : वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, भारतीय शेयर बाजार में मजबूती और विदेशी निवेशकों की वापसी जैसे सकारात्मक संकेतों के बावजूद भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर होता जा रहा है। बुधवार को शुरुआती कारोबार में रुपया 10 पैसे टूटकर 94.86 प्रति डॉलर पर पहुंच गया, जिससे बाजार में चिंता बढ़ गई है।

विदेशी मुद्रा बाजार के आंकड़ों के अनुसार इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज में रुपया 94.88 पर खुला और बाद में 94.86 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। इससे पहले मंगलवार को भारतीय मुद्रा 13 पैसे की गिरावट के साथ 94.76 प्रति डॉलर पर बंद हुई थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये पर दबाव का सबसे बड़ा कारण अमेरिकी डॉलर की वैश्विक मजबूती है। डॉलर इंडेक्स लगातार मजबूत बना हुआ है, जिसके चलते दुनिया की कई मुद्राओं की तरह भारतीय रुपये पर भी दबाव बढ़ रहा है। डॉलर इंडेक्स फिलहाल 101.48 के आसपास कारोबार कर रहा है।

हालांकि दूसरी ओर कई ऐसे कारक हैं जो रुपये को बड़ी गिरावट से बचा रहे हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमतों में पिछले एक महीने के दौरान 20 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की गई है, जिससे भारत के आयात बिल पर दबाव घटा है। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भी भारतीय बाजार में दोबारा निवेश बढ़ा रहे हैं।

घरेलू शेयर बाजार में भी सकारात्मक माहौल बना हुआ है। बुधवार को शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 187 अंकों से अधिक चढ़कर 76,388 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 23,878 के पार कारोबार करता दिखाई दिया। एक्सचेंज आंकड़ों के मुताबिक विदेशी निवेशकों ने मंगलवार को भी शुद्ध रूप से भारतीय शेयरों में निवेश किया।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल आयातकों की ओर से डॉलर की मांग अधिक बनी हुई है, जबकि निर्यातकों की डॉलर बिक्री अपेक्षाकृत सीमित है। यही वजह है कि सकारात्मक आर्थिक संकेतों के बावजूद रुपये को मजबूती नहीं मिल पा रही है।

विश्लेषकों के अनुसार यदि रुपया 95 के स्तर से ऊपर टिकता है तो इसमें और कमजोरी आ सकती है तथा यह 95.50 से 96 प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच सकता है। वहीं 94 रुपये के आसपास इसे तत्काल समर्थन मिलने की संभावना है।

जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में रुपये की दिशा अमेरिकी डॉलर की चाल, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेश प्रवाह और भारतीय रिजर्व बैंक की नीतिगत गतिविधियों पर निर्भर करेगी। फिलहाल बाजार सतर्क रुख अपनाए हुए है और निवेशकों की नजर वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर बनी हुई है।