नई दिल्ली, 24 जून 2026 Fact Recorder
Business Desk: भारतीय बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली चिंता का विषय बनती जा रही है। बाजार आंकड़ों के अनुसार विदेशी निवेशक बैंकिंग शेयरों से प्रतिदिन औसतन 1,100 करोड़ रुपये से अधिक की निकासी कर रहे हैं, जिससे बैंकिंग इंडेक्स और व्यापक शेयर बाजार दोनों पर दबाव देखने को मिल रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं लंबे समय से विदेशी निवेशकों की पहली पसंद रही हैं। एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक जैसे प्रमुख निजी बैंकों में विदेशी निवेशकों की बड़ी हिस्सेदारी है। ऐसे में वैश्विक अनिश्चितता या जोखिम बढ़ने पर निवेशक सबसे पहले इन्हीं शेयरों में मुनाफावसूली करते हैं, क्योंकि इनमें पर्याप्त लिक्विडिटी होती है।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और डॉलर की मजबूती भी इस बिकवाली की बड़ी वजह है। अमेरिका में निवेश पर बेहतर रिटर्न मिलने के कारण विदेशी फंड उभरते बाजारों से पूंजी निकालकर अमेरिकी बॉन्ड और डॉलर आधारित परिसंपत्तियों की ओर रुख कर रहे हैं।
इसके अलावा भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में क्रेडिट ग्रोथ और डिपॉजिट ग्रोथ के बीच बढ़ता अंतर भी निवेशकों की चिंता का कारण बना हुआ है। ऋण वितरण तेजी से बढ़ रहा है, जबकि जमा राशि की वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी है। इससे बैंकों का क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है और आने वाले समय में नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पर दबाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली का असर बैंकिंग शेयरों के प्रदर्शन पर साफ दिखाई दे रहा है। बैंकिंग इंडेक्स में ऊपरी स्तरों से गिरावट दर्ज की गई है, जिससे बाजार की तेजी भी सीमित हुई है।
हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशक (DII), जिनमें म्यूचुअल फंड और एलआईसी जैसी संस्थाएं शामिल हैं, इस दौरान खरीदारी कर बाजार को सहारा दे रहे हैं। घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी के कारण बाजार में बड़ी गिरावट नहीं आई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव कम नहीं होता, तब तक बैंकिंग शेयरों में मजबूत तेजी की संभावना सीमित रह सकती है।
बाजार जानकारों का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में निवेशकों को बैंकिंग क्षेत्र में निवेश से पहले वैश्विक आर्थिक संकेतकों, अमेरिकी ब्याज दरों और घरेलू बैंकिंग सेक्टर की आय वृद्धि पर विशेष नजर रखनी चाहिए।













