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कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट, पेट्रोल-डीजल और एलपीजी सस्ती होने की उम्मीद

15 June 2026 Fact Recorder

Business Desk: वैश्विक ऊर्जा बाजार से आम उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह रुझान जारी रहता है तो आने वाले दिनों में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में राहत मिल सकती है।

ब्रेंट और अमेरिकी क्रूड में तेज गिरावट

सोमवार सुबह अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 3.9 प्रतिशत गिरकर 84 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं अमेरिकी क्रूड (WTI) लगभग 4.8 प्रतिशत टूटकर 81 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया।

तेल बाजार में यह गिरावट उस घोषणा के बाद आई, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव के समाप्त होने तथा समझौते पर सहमति बनने की जानकारी दी।

होर्मुज जलडमरूमध्य फिर खुलेगा

ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ समझौता पूरा हो चुका है और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के फिर से खोला जाएगा। इसके साथ ही अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी हटाने का भी आदेश दिया गया है।

यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है।

दुनिया भर की थी नजर

विशेषज्ञों का मानना था कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बाधित रहता तो कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकती थीं। इससे दुनिया भर में ईंधन महंगा होने और महंगाई बढ़ने की आशंका थी।

समझौते की खबर सामने आते ही बाजार में आपूर्ति संबंधी चिंताएं कम हुईं और निवेशकों का भरोसा लौटा, जिसके परिणामस्वरूप तेल की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली।

19 जून को हो सकते हैं औपचारिक हस्ताक्षर

जानकारी के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच हुए इस शांति समझौते पर 19 जून को स्विट्ज़रलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। पाकिस्तान सहित कई देशों की मध्यस्थता और कूटनीतिक प्रयासों के बाद दोनों पक्ष सैन्य गतिविधियां रोकने पर सहमत हुए हैं।

भारत को मिल सकता है फायदा

भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सीधा असर घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ सकता है। यदि कीमतें लंबे समय तक निचले स्तर पर बनी रहती हैं, तो पेट्रोल, डीजल और एलपीजी के दामों में कटौती की संभावना बढ़ सकती है, जिससे आम जनता को राहत मिलेगी।