11 June 2026 Fact Recorder
Business Desk: लगातार एक साल तक निवेशकों की पहली पसंद बने गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) से मई 2026 में बड़ी निकासी दर्ज की गई है। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, मई महीने में गोल्ड ईटीएफ से 725 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी हुई। पिछले 12 महीनों में यह पहला अवसर है जब निवेशकों ने सोने में निवेश घटाया है। इससे पहले अप्रैल में गोल्ड ईटीएफ में 3,040 करोड़ रुपये का निवेश आया था।
मुनाफावसूली बनी निकासी की बड़ी वजह
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निकासी किसी घबराहट का संकेत नहीं है, बल्कि निवेशकों की मुनाफावसूली की रणनीति का हिस्सा है। हाल के महीनों में सोने की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला, जिसके बाद निचले स्तर पर निवेश करने वाले कई निवेशकों ने लाभ बुक करना उचित समझा।
इसके अलावा, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर जारी अटकलों ने भी निवेशकों को सतर्क रहने के लिए प्रेरित किया है।
निकासी के बावजूद बढ़ा गोल्ड ETF का आकार
दिलचस्प बात यह है कि भारी निकासी के बावजूद गोल्ड ईटीएफ का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) घटने के बजाय बढ़ गया। मई के अंत तक इसका एयूएम करीब 4 प्रतिशत बढ़कर 1.85 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इसका मुख्य कारण सोने की कीमतों में आई मजबूती रही, जिसने फंड में मौजूद निवेश की कुल वैल्यू को बढ़ा दिया।
सिल्वर ETF में निवेशकों की बढ़ी दिलचस्पी
जहां सोने से कुछ निवेशकों ने पैसा निकाला, वहीं चांदी में निवेश का उत्साह बढ़ता दिखाई दिया। मई के दौरान सिल्वर ईटीएफ में 2,133 करोड़ रुपये का निवेश दर्ज किया गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों और औद्योगिक उपयोग में बढ़ती मांग के कारण चांदी के भविष्य को लेकर निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है।
क्या खत्म हो गई सोने की रैली?
विशेषज्ञों के अनुसार, गोल्ड ईटीएफ से निकासी को सोने की तेजी के अंत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह केवल ऊंचे स्तरों पर की गई सामान्य मुनाफावसूली है। वर्ष 2026 के दौरान गोल्ड ईटीएफ में कुल निवेश का रुझान अब भी मजबूत बना हुआ है और सुरक्षित निवेश के विकल्प के रूप में सोने पर निवेशकों का भरोसा कायम है।
निवेशकों के लिए सलाह
बाजार जानकारों का कहना है कि लंबी अवधि के निवेशकों को अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से घबराने की जरूरत नहीं है। पोर्टफोलियो में संतुलन बनाए रखते हुए सोने और चांदी दोनों में निवेश की रणनीति अपनाई जा सकती है। फिलहाल बाजार में जो बदलाव दिख रहा है, वह निवेशकों की रणनीतिक मुनाफावसूली का संकेत है, न कि सोने से भरोसा उठने का।













