9 June 2026 Fact Recorder
National Desk: पूर्व भारतीय क्रिकेटर और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद यूसुफ पठान को वडोदरा में सरकारी जमीन पर कथित अवैध कब्जे के मामले में गुजरात हाई कोर्ट से कड़ी फटकार मिली है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि केवल सेलिब्रिटी होने के कारण किसी को कानून से छूट नहीं दी जा सकती।
मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति डी.एन. रे की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी किए बिना किसी व्यक्ति ने जमीन पर कब्जा कैसे कर लिया। अदालत ने कहा कि जमीन के आवंटन के लिए केवल एक प्रस्ताव था, जिसे बाद में राज्य सरकार ने खारिज कर दिया था। ऐसे में जमीन पर कब्जा वैध नहीं माना जा सकता।
कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकारी जमीन पर बिना अधिकार के कब्जा करने वाले किसी भी व्यक्ति के साथ विशेष व्यवहार नहीं किया जा सकता। अदालत ने यूसुफ पठान के वकील से पूछा कि जमीन खाली करने के लिए कितना समय चाहिए। साथ ही, कोर्ट ने जुर्माना लगाने के संकेत भी दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 15 जून को निर्धारित की गई है।
दरअसल, यूसुफ पठान ने हाई कोर्ट के एकल पीठ के अगस्त 2025 के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें अतिक्रमणकारी माना गया था। अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि लंबे समय तक बिना भुगतान किए सरकारी जमीन पर कब्जा बनाए रखने से कोई व्यक्ति उसका मालिक नहीं बन जाता। कोर्ट ने यह भी कहा कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों को कानून का पालन कर समाज के सामने सही उदाहरण पेश करना चाहिए।
मामले की शुरुआत तब हुई थी जब वडोदरा नगर निगम 978 वर्ग मीटर सरकारी जमीन को बिना सार्वजनिक नीलामी के 99 वर्ष की लीज पर यूसुफ पठान को देने पर विचार कर रहा था। हालांकि, राज्य सरकार ने 6 जून 2024 को इस प्रस्ताव को रद्द कर दिया और जमीन से सभी अवैध कब्जे हटाने के निर्देश दिए। इसी सरकारी आदेश को चुनौती देते हुए पठान अदालत पहुंचे थे।













